एअर इंडिया अपनी इंटरनेशनल और डोमेस्टिक उड़ानों में करीब 10% की कटौती करने जा रही है। टाटा ग्रुप की यह एयरलाइन अक्टूबर के अंत से शुरू होने वाले विंटर शेड्यूल से रोजाना लगभग 100 उड़ानें बंद करेगी। वर्तमान में एयरलाइन हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन करती है। वजह-फ्यूल की बढ़ती कीमतों और स्पेयर पार्ट्स की कमी इन अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर पड़ेगा असर डेवलपमेंट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एयरलाइन ने भारत को उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया से जोड़ने वाले कई महत्वपूर्ण इंटरनेशनल रूट्स पर फ्लाइट्स की फ्रीक्वेंसी कम करने का निर्णय लिया है। सैन फ्रांसिस्को, शिकागो, लंदन और सिडनी: इन शहरों के लिए साप्ताहिक उड़ानों में कटौती की जाएगी। उदाहरण: जहां अभी डेली सर्विस है, वहां अब हफ्ते में केवल चार या पांच दिन ही फ्लाइट्स चल सकती हैं। डोमेस्टिक नेटवर्क में भी होगा बदलाव घरेलू रूट्स पर भी एयर इंडिया अपनी फ्रीक्वेंसी कम करेगी। कंपनी का प्लान मेट्रो-टू-मेट्रो रूट्स पर उन फ्लाइट्स को कम करने का है जहां वर्तमान में कई डेली सर्विसेज चल रही हैं। इससे एयरलाइन को अपने विमानों को अधिक मुनाफे वाले रूट्स पर लगाने या उन्हें स्टैंडबाय पर रखने में मदद मिलेगी, जिससे ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) में सुधार हो सके। मैनेजमेंट और एक्सपर्ट्स की राय एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशनल कॉस्ट और विमानों की उपलब्धता की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। पिछले कुछ महीनों में जेट फ्यूल के दाम काफी बढ़े हैं, जिससे लंबी दूरी के कई रूट्स वर्तमान फ्रीक्वेंसी पर घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, “हम मार्केट डिमांड और ऑपरेशनल दिक्कतों के आधार पर अपने फ्लाइट शेड्यूल की लगातार समीक्षा करते हैं ताकि कुशलता से काम कर सकें।” एविएशन एनालिस्ट्स का मानना है कि ATF की कीमतें एयरलाइन की ऑपरेटिंग कॉस्ट का करीब 40% होती हैं। ऐसे में टाटा ग्रुप के लिए एयर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन के दौरान ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाना एक बड़ी चुनौती है। ATF क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
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