बेंगलुरु की मशहूर ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने इस टी20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के बजाय नामीबिया की टीम को स्पॉन्सर करने का फैसला किया. सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि एक भारतीय कंपनी नामीबिया जैसी छोटी टीम पर दांव क्यों लगा रही है? लेकिन असल खेल इसके पीछे छिपे आंकड़ों और समझदारी का है. जहां टीम इंडिया को स्पॉन्सर करने के लिए अपोलो टायर्स जैसी कंपनियों ने 579 करोड़ रुपये जैसी भारी-भरकम रकम चुकाई, वहीं फ्लिपकार्ट ने महज 1 करोड़ रुपये में नामीबिया का टाइटल स्पॉन्सर बनने का सौदा कर लिया. यह रकम भारतीय टीम पर खर्च होने वाली राशि का केवल 0.17 प्रतिशत है.
सक्सेसफुल हो गया कैम्पेन, मिल गए 25 करोड़ व्यू
इस डील की सबसे विशेष बात यह है कि नामीबिया उसी ग्रुप-ए में है जिसमें भारत, पाकिस्तान और अमेरिका जैसी टीमें शामिल हैं. फ्लिपकार्ट के वाइस प्रेसिडेंट (ग्रोथ एंड मार्केटिंग) प्रतीक अरुण शेट्टी का मानना है कि उन्हें पता था कि जब भी भारत या पाकिस्तान का मैच होगा, तो दर्शक टीवी से चिपके रहेंगे. ऐसे में जब नामीबिया की जर्सी पर फ्लिपकार्ट का लोगो चमकेगा, तो उसे लाखों-करोड़ों लोग देखेंगे. शेट्टी कहते हैं, “हमारा मकसद इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला ब्रांड बनना था और हमने वही किया. सोशल मीडिया पर अब तक हमारे इस कैम्पेन को 25 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं और करीब 5,500 क्रिएटर्स और मीम पेजेस ने खुद से हमारे बारे में पोस्ट किया है.”
इसे ही कहते हैं स्मार्ट प्लानिंग!
मार्केटिंग की दुनिया के जानकार भी फ्लिपकार्ट की इस ‘स्मार्ट प्लानिंग’ के कायल हो गए हैं. मीडिया केयर ब्रांड सॉल्यूशंस के निदेशक यासीन हमिदानी का कहना है कि यह विज्ञापन की दुनिया में एक तरह की हैकिंग है. उन्होंने बहुत ही कम कीमत पर वह पहचान हासिल कर ली, जो आमतौर पर बड़े ब्रांड्स को करोड़ों खर्च करके मिलती है. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा कुछ समय पहले कर्नाटक के डेयरी ब्रांड ‘नंदिनी’ ने स्कॉटलैंड और आयरलैंड की टीमों के साथ किया था.
हैशफेम के सह-संस्थापक अनिरुद्ध श्रीधरन इसे प्रीमियम टैक्स से बचने का बेहतरीन तरीका बताते हैं. उनका कहना है कि फ्लिपकार्ट ने बिना करोड़ों का टैक्स चुकाए वही नेशनल ब्रॉडकास्ट और ऑडियंस हासिल कर ली, जो बड़े स्पॉन्सर्स को मिलती है.
दिलचस्प बात यह भी है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए यह समय कोई बहुत बड़ी सेल का नहीं होता, इसलिए भारी निवेश करना जोखिम भरा हो सकता था. फ्लिपकार्ट ने इस ऑफ-सीजन में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी. 12 फरवरी को जब लोगों ने टीवी पर नामीबिया की जर्सी देखी, तो इंटरनेट पर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर फ्लिपकार्ट वहां क्या कर रहा है. इसी जिज्ञासा ने कंपनी को सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चित ब्रांड बना दिया.
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