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Crypto Investment : अब क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना जोखिम वाला काम नहीं रहा है. क्रिप्टो निवेशकों को पोर्टफोलियो का विविधीकरण करने और लंबे समय तक पूंजी बनाने का एक नया रास्ता प्रदान करता है. ज्ञान, अनुशासन और नियमों का पालन करके इसे अपनाने से निवेशक डिजिटल असेट्स को जिम्मेदारी से अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे इक्विटी या म्यूचुअल फंड्स के साथ करते हैं.
क्रिप्टो को भी इनकम टैक्स के दायरे में शामिल कर लिया गया है.
कॉइनडीसीएक्स के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता का कहना है कि भारत में क्रिप्टो एक्सचेंज अन्य रेगुलेटेड निवेश प्लेटफॉर्म्स की तरह काम करते हैं. वर्चुअल डिजिटल असेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VDASPs), जिनमें एक्सचेंज और वॉलेट प्रोवाइडर्स शामिल हैं, इन्हें भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत FIU-IND के साथ रजिस्टर करना अनिवार्य है. रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स सभी यूजर्स के लिए फुल KYC करते हैं, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड्स रखते हैं और हाई-वैल्यू या संदिग्ध ट्रांजेक्शन्स की रिपोर्टिंग करते हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
निवेशकों के लिए बदल गया माहौल
निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि क्रिप्टो एक्सचेंज एक रेगुलेटेड और जवाबदेह माहौल में काम करने लगे हैं. निवेशक आत्मविश्वास के साथ डिजिटल असेट्स खरीद, बेच और होल्ड कर सकते हैं, क्योंकि अब प्लेटफॉर्म कानूनी और अनुपालन मानकों का पालन करता है. भारत में क्रिप्टो को इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत वर्चुअल डिजिटल असेट (VDA) के रूप में कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है. इससे निवेशकों को डिजिटल असेट्स को होल्ड करने, खरीदने और बेचने का स्पष्ट अधिकार मिलता है, बशर्ते वे लागू नियमों का पालन करें.
लॉन्ग टर्म एसेट के रूप में मान्यता
क्रिप्टो में निवेश का फैसला, दूसरी परिसंपत्ति वर्ग की ही तरह फंडामेंटल्स, रिस्क और पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी को समझने पर निर्भर करता है. निवेशकों को ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स की रिसर्च करने, उनकी उपयोगिता और टोकन इकोनॉमिक्स का आकलन करने तथा नेटवर्क एक्टिविटी का अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि वे पूंजी लगाने के लिए पूरी तरह सोच-समझकर निर्णय ले सकें.
रेगुलेशन ने बढ़ाया भरोसा
भारत में कई संस्थाएं सुनिश्चित करती हैं कि क्रिप्टो इकोसिस्टम सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से काम करे. FIU-IND प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अनुपालन की निगरानी करता है, जिसके तहत एक्सचेंज और वॉलेट प्रोवाइडर्स को रिकॉर्ड्स रखने और हाई-वैल्यू या संदिग्ध ट्रांजेक्शन्स की रिपोर्टिंग करनी होती है. वित्त मंत्रालय नीति और टैक्सेशन नियमों की निगरानी करता है, जबकि CBDT इनकम टैक्स रिटर्न्स में क्रिप्टो से होने वाले लाभ की उचित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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