कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। विदेशी ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने से कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। कंपनियों को पेट्रोल पर 18 और डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है। इससे पहले जेफरीज की एक रिपोर्ट में भी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर 21 रुपए और डीजल पर 28 रुपए के नुकसान की बात कही थी। देश की सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित 5 राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ सकती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया ईरान-इजराइल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची हैं, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर बुरा असर पड़ा है। अभी कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पर है। 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमत 27 डॉलर बढ़ी 3 बड़े कारणों से बढ़ी तेल कंपनियों की मुसीबत चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम मैक्वायरी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद अप्रैल के अंत तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। इस चुनाव के नतीजे 4 मई को आने हैं। कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर के उछाल से कंपनियों का मार्केटिंग लॉस करीब 6 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है। भारत की निर्भरता और अर्थव्यवस्था पर असर भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 45% मिडिल ईस्ट और 35% रूस से आता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) के लिए भी खतरा हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार की कमाई पर भी दबाव सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22% था, जो अब घटकर सिर्फ 8% रह गया है। अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी मौजूदा कीमतों पर तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।
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