2026 में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बदल रहा है, लेकिन बेहतर सड़कों का आनंद अब जेब पर भारी पड़ने लगा है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और विभिन्न राज्य प्राधिकरणों ने महंगाई और मेंटेनेंस के आधार पर टोल दरों में 4-5% की बढ़ोतरी की है. आज कई ऐसे टोल प्लाजा हैं, जहां एक बार कार निकालने की कीमत ₹150 से लेकर ₹300 के पार पहुंच चुकी है. यदि आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों के बीच यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन सबसे महंगे टोल पॉइंट्स की जानकारी आपके बजट के लिए बेहद जरूरी है.
2026 में भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बदल रहा है, लेकिन बेहतर सड़कों का आनंद अब जेब पर भारी पड़ने लगा है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और विभिन्न राज्य प्राधिकरणों ने महंगाई और मेंटेनेंस के आधार पर टोल दरों में 4-5% की बढ़ोतरी की है. आज कई ऐसे टोल प्लाजा हैं, जहां एक बार कार निकालने की कीमत ₹150 से लेकर ₹300 के पार पहुंच चुकी है. यदि आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे शहरों के बीच यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन सबसे महंगे टोल पॉइंट्स की जानकारी आपके बजट के लिए बेहद जरूरी है.

खालापुर टोल प्लाजा (मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे): महाराष्ट्र में स्थित यह टोल प्लाजा वर्तमान में भारत के सबसे महंगे सिंगल-पॉइंट टोल में टॉप पर है. 2026 के अपडेट के अनुसार, यहां एक कार के लिए सिंगल जर्नी का शुल्क ₹320 वसूला जाता है. हालांकि यह पूरे 94.5 किमी के मार्ग का सामूहिक शुल्क है, लेकिन मुख्य वसूली इसी पॉइंट पर की जाती है. भारी ट्रैफिक और घाट सेक्शन के हाई मेंटेनेंस के कारण यहां दरें बहुत ज्यादा हैं. बार-बार सफर करने वालों के लिए ₹10,000 से अधिक का मंथली पास उपलब्ध है. बिना FASTag के यहां प्रवेश करना सीधा ₹640 का जुर्माना (डबल टोल) आमंत्रित करता है.

अटल सेतु / MTHL (मुंबई-नवी मुंबई): मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने वाला ‘अटल बिहारी वाजपेयी सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु’ भारत का सबसे महंगा समुद्री ब्रिज टोल प्लाजा है. यहां महज 21.8 किमी के सफर के लिए कार चालकों को ₹250 की भारी राशि चुकानी पड़ती है. इंजीनियरिंग का चमत्कार माने जाने वाले इस ब्रिज पर आधुनिक तकनीक और समय की बड़ी बचत के नाम पर यह ऊंचा शुल्क लिया जाता है. 2026 में इसके मेंटेनेंस शुल्क में हुई वृद्धि के बाद, यह उन लोगों के लिए लग्जरी बन गया है जो जाम से बचकर मिनटों में समुद्र पार करना चाहते हैं.
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शेषागिरीहल्ली टोल प्लाजा (बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे): कर्नाटक का यह एक्सप्रेसवे दक्षिण भारत का सबसे महंगा रूट बन चुका है. शेषागिरीहल्ली (Sheshagirihalli) प्लाजा पर कार, जीप और वैन के लिए एक तरफ का टोल शुल्क ₹170 निर्धारित किया गया है. यह NH-275 का प्रमुख पॉइंट है, जहां 2026 में बढ़ी हुई दरों ने डेली कम्यूटर्स की चिंता बढ़ा दी है. यहां GPS-बेस्ड टोलिंग का ट्रायल भी चल रहा है, लेकिन वर्तमान में FASTag से एकमुश्त कटौती की जाती है. हाई-स्पीड कॉरिडोर और बेहतरीन कनेक्टिविटी की वजह से यह महंगा होने के बावजूद यात्रियों की पहली पसंद बना हुआ है.

सैदपुर/काशी टोल प्लाजा (दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे): उत्तर प्रदेश के इस सबसे व्यस्त एक्सप्रेसवे पर सैदपुर मुख्य टोल पॉइंट है. दिल्ली से मेरठ की पूरी यात्रा के लिए यहां कार चालकों को लगभग ₹160 का भुगतान करना पड़ता है. 2026 के नए नियमों के तहत यहां ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) सिस्टम लागू है, जो दूरी के हिसाब से पैसे काटता है, लेकिन पूरे स्ट्रेच के लिए यह राशि भारत के शीर्ष टोल शुल्क में आती है. शहरी भीड़भाड़ से बचने और मात्र 45 मिनट में मेरठ पहुंचने के लिए लोग इस महंगे टोल को चुकाने के लिए तैयार रहते हैं.

जेवर/मथुरा मुख्य टोल प्लाजा (यमुना एक्सप्रेसवे): ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच यमुना एक्सप्रेसवे पर तीन मुख्य प्लाजा हैं, जिनमें जेवर और मथुरा पर सबसे अधिक शुल्क लिया जाता है. यहां एक कार के लिए एक सेक्शन का टोल लगभग ₹150 से ₹165 के बीच रहता है. हालांकि पूरी यात्रा का कुल टोल ₹440 से अधिक है, लेकिन सिंगल प्लाजा पर यह शुल्क देश के चुनिंदा महंगे पॉइंट्स में आता है. 2026 में सुरक्षा फीचर्स और बेहतर रोड सरफेस के कारण दरों में मामूली इजाफा किया गया है. आगरा जाने वाले पर्यटकों के लिए यह सबसे तेज लेकिन सबसे खर्चीला रास्ता है.
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