वहीं साल 2025 की बात करें तो यह लग्जरी घरों की मांग के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है. हाल ही में आई ‘इंडिया मार्केट मॉनिटर Q4 2025’ की रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में हुई कुल घरों की बिक्री में लग्जरी घरों की हिस्सेदारी लगभग 27 फीसदी रही है, जो कुल बिक्री के एक तिहाई से महज कुछ ही फीसदी नीचे है. पहली बार ऐसा हुआ है जब महंगे और लग्जरी घरों की बिक्री ने मिड और अफोर्डेबल सेगमेंट को पीछे छोड़ दिया है. कुल आवासीय बिक्री में प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी तक पहुंचना इसलिए भी बड़ी बात है क्योंकि चार साल पहले तक यह 2022 में महज 12 फीसदी के आसपास थी. यह बदलाव साफ तौर पर दर्शाता है कि भारतीय खरीदारों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं और बहुत जल्दी बदल रही हैं.
महज 4 साल में कैसे हुआ ये बदलाव?
रियल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो इस बदलाव के पीछे कई मजबूत कारण हैं. बीते कुछ वर्षों में कॉरपोरेट सेक्टर में वेतन वृद्धि, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार और बिजनेस क्लास की मजबूत आय ने लोगों की क्रय शक्ति को बढ़ा दिया है. इसके साथ ही, एनआरआई निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने भी लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट को नई ऊंचाई दी है.
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी बताते हैं कि आमतौर पर करोड़ों रुपये के घरों की बिक्री के दौरान देखा जाता है कि आज का खरीदार बड़ा घर, बेहतर लोकेशन, वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं और प्रीमियम कम्युनिटी चाहता है. क्लबहाउस, स्विमिंग पूल, ग्रीन स्पेस, स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल डिजाइन अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन चुके हैं. यही कारण है कि मांग को देखते हुए डेवलपर्स भी अपनी रणनीति बदल रहे हैं और हाई-एंड व सुपर लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.
शहरों के हिसाब से बदली लग्जरी की परिभाषा
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर कहते हैं कि एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख रियल एस्टेट बाजारों में प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की मजबूत मांग इस बात का प्रमाण है कि भारतीय हाउसिंग मार्केट की बुनियाद बेहद मजबूत है. इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, बेहतर कनेक्टिविटी और कॉरपोरेट विस्तार ने हाई-एंड रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को नई ऊंचाई दी है. भरोसा है कि यह सेगमेंट आने वाले 5–7 वर्षों तक स्थायी ग्रोथ दिखाता रहेगा.
सुपर लग्जरी सेगमेंट में जबरदस्त उछाल
प्रीमियम के साथ-साथ सुपर लग्जरी घरों की मांग में भी 2025 के दौरान लगभग 70 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खासकर अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में सालाना आधार पर 60 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ देखने को मिली. यह संकेत देता है कि अल्ट्रा-हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स अब रियल एस्टेट को सबसे सुरक्षित और स्थायी एसेट क्लास मान रहे हैं.
घर के मामले में समझौता नहीं
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी बताते हैं, ‘पिछले कुछ वर्षों में हमने खरीदारों की सोच में बड़ा बदलाव देखा है. अब लोग छोटे और समझौता करने वाले घरों के बजाय बड़े, बेहतर प्लानिंग वाले और सुविधाओं से लैस घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं. खासतौर पर मेट्रो और टियर-1 शहरों में प्रीमियम घरों की मांग यह दिखाती है कि भारतीय खरीदार अब रियल एस्टेट को केवल जरूरत नहीं, बल्कि स्टेटस और सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहा है.’
सप्लाई और डिमांड में बना संतुलन
रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में करीब 62,500 घरों की बिक्री दर्ज की गई, जबकि लगभग 60,000 नए यूनिट्स लॉन्च हुए. मुंबई, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद ने कुल बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया. यह आंकड़े दिखाते हैं कि बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच एक स्वस्थ संतुलन बना हुआ है.
डेवलपर्स के लिए भी है चुनौती
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल कहते हैं कि डेवलपर्स के लिए भी यह दौर बेहद महत्वपूर्ण है. आज प्रोजेक्ट की सफलता केवल कीमत पर नहीं, बल्कि डिजाइन, लोकेशन, सस्टेनेबिलिटी और डिलीवरी की विश्वसनीयता पर निर्भर करती है. लग्जरी और सुपर लग्जरी सेगमेंट में बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि बाजार अब ज्यादा परिपक्व और क्वालिटी-ड्रिवन हो चुका है. आने वाले समय में वही डेवलपर्स आगे रहेंगे जो खरीदारों की अपेक्षाओं से एक कदम आगे सोचेंगे.
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