2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (गोल्ड ETFs) में निवेशकों ने 31,561 करोड़ रुपए का निवेश किया है। ये दिसंबर 2025 तिमाही के मुकाबले 36% ज्यादा है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में गोल्ड ETF में 23,132 करोड़ रुपए का निवेश आया था। यह पिछले साल की जनवरी-मार्च तिमाही के मुकाबले करीब 6 गुना ज्यादा निवेश आया है। साल 2025 की पहली तिमाही में यह निवेश मात्र 5,654 करोड़ रुपए था। जियोपॉलिटिकल तनाव और बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक अब सुरक्षित संपत्ति के रूप में सोने पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। गोल्ड ETFs में निवेश के 2 बड़े कारण एक्सपर्ट की राय: क्यों पसंद आ रहा है डिजिटल गोल्ड? मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया की सीनियर एनालिस्ट नेहल मेश्राम का कहना है कि गोल्ड ETFs निवेशकों को फिजीकल रखने की झंझट के बिना निवेश का पारदर्शी और आसान तरीका देते हैं। यह बाजार की अनिश्चितता के समय पोर्टफोलियो को सुरक्षा प्रदान करता है। क्या होता है गोल्ड ETF? एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETFs की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा।
इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? गोल्ड ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध गोल्ड ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद गोल्ड ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही गोल्ड ETF को बेचा जाता है। सोने में सीमित निवेश फायदेमंद एक्सपर्ट के अनुसार, भले ही आपको सोने में निवेश करना पसंद हो तब भी आपको इसमें सीमित निवेश ही करना चाहिए। कुल पोर्टफोलियो का सिर्फ 10 से 15% ही सोने में निवेश करना चाहिए। किसी संकट के दौर में सोने में निवेश आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकता
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