यूरोपीय कमीशन चीफ उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार को कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता होने वाला है। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 200 करोड़ लोगों के लिए नया बाजार बनाएगा, जो वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा। उर्सुला ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में यह बात कही। वे 25 से 27 जनवरी तक भारत दौरे पर रहेंगी और 27 जनवरी को होने वाले भारत-ईयू समिट में इस समझौते के पूरा होने की घोषणा की जा सकती है। उर्सुला ने एग्रीमेंट को मदर ऑफ ऑल डील्स बताया उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने संबोधन में इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया। उन्होंने कहा, “मैं भारत जा रही हूं। अभी कुछ काम बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक समझौते की दहलीज पर हैं। यह डील यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे गतिशील देश भारत के साथ व्यापार करने का ‘फर्स्ट-मूवर एडवांटेज’ (पहला बड़ा मौका) देगी।” समझौते से क्या फायदा होगा यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों पक्षों के बीच व्यापार को बहुत बढ़ाएगा। EUके साथ ट्रेड 2023-24 में $137.41 बिलियन रहा, इस एग्रीमेंट के बाद दोगुना होने की उम्मीद है। समझौते से सामान और सेवाओं पर टैरिफ कम होंगे, जिससे व्यापार आसान बनेगा। दोनों पक्ष एक रक्षा समझौता और 2026-2030 के लिए रणनीतिक योजना भी घोषित करेंगे। ट्रम्प टैरिफ के बीच भारत-ईयू समझौते का ऐलान यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब ट्रम्प की नई टैरिफ नीतियों और व्यापारिक प्रतिबंधों ने वैश्विक सप्लाई चेन में समस्याएं पैदा की हैं। अमेरिका की ‘टैरिफ वॉर’ से भारत और यूरोपीय संघ के सभी 27 देश प्रभावित हुए हैं। ऐसे में दोनों पक्षों ने आपसी व्यापार को मजबूती देने का फैसला किया है। भारत यूरोपीय देशों के साथ समझौता करके भारतीय प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए नए बाजार तलाश कर रहा है। गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे यूरोपीय नेता इस बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। 25 से 27 जनवरी के बीच होने वाले इस दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। 19 साल का लंबा इंतजार खत्म होगा भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की पहली कोशिश साल 2007 में शुरू हुई थी। हालांकि, महत्वाकांक्षाओं और नियमों में मतभेद के कारण 2013 में इन वार्ताओं को रोक दिया गया था। करीब 9 साल के अंतराल के बाद जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई। अब 2026 की शुरुआत में इस डील का फाइनल होने जा रही है।
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