स्मार्टफोन पर एक टैप और 10 मिनट में घर पर हेल्पर- यह बस एक आइडिया नहीं रह गया, बल्कि लाखों भारतीयों की जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है। इंस्टेंट होम सर्विस एप्स मार्च में 1 करोड़ मासिक एक्टिव यूजर पार कर चुके हैं। इस रेस में पैसा भी उतनी ही तेजी से दौड़ रहा है। ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी मॉर्गन स्टेनली की एक रिसर्च नोट के मुताबिक, अर्बन कंपनी, प्रोंटो और स्नैबिट के कुल मासिक एक्टिव यूजर (एमएयू) मार्च में 1.04 करोड़ हो गए। अर्बन कंपनी इनमें सबसे आगे है, लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। नए खिलाड़ी इसकी बाजार हिस्सेदारी छीन रहे हैं। इन्हें ऊंचे वैल्युएशन पर तगड़ी फंडिंंग भी मिल रही है। अर्बन कंपनी का इंस्टाहेल्प वर्टिकल हर महीने 10 लाख बुकिंग पार कर चुका है। प्रोंटो रोजाना करीब 18,000 ऑर्डर संभाल रहा है। नए प्लेटफॉर्म फ्रेश डिमांड का बड़ा हिस्सा खींच रहे अर्बन कंपनी का यूजर बेस में सबसे बड़ा है। लेकिन प्रोंटो मार्च में 43% एप डाउनलोड के साथ श्रेणी में नंबर एक रहा। अर्बन कंपनी का शेयर 31% और स्नैबिट का 26% रहा। यानी नए प्लेटफॉर्म फ्रेश डिमांड का बड़ा हिस्सा खींच रहे हैं। रोजाना और मासिक एक्टिव यूजेज में भी प्रोंटो और स्नैबिट का शेयर लगातार बढ़ रहा है। यह बताता है कि यूजर लॉयल्टी भी इनकी तरफ शिफ्ट हो रही है। वैल्युएशन दोगुनी, फंडिंग की होड़ प्रोंटो- यह प्लेटफॉर्म 141-188 करोड़ रुपए का एक्सटेंशन राउंड जुटाने की तैयारी में है। इसके लिए वैल्युएशन 1,883 करोड़ रुपए आंका गया है, जो पिछले राउंड का दोगुना है। स्नैबिट- मिराए एसेट और एसआईजी से 565-659 करोड़ रुपए जुटाने की बातचीत चल रही है। इसके लिए संभावित वैल्युएशन 3,295-3,766 करोड़ रुपए हो सकता है। इस साल मार्च तक घरेलू इंस्टेंट होम सर्विस इंडस्ट्री की स्थिति मंथली एक्टिव यूजर – 1.04 करोड़ मासिक बुकिंग – 20 लाख+ प्रोंटो डाउनलोड शेयर – 43% मार्च 2026 में स्नैबिट की फंड रेजिंग – ₹590 करोड़ (659 करोड़ पर बात) प्रोंटो की फंडिंग -₹235 करोड़, मार्च में बड़ा सवाल… ग्रोथ तो है, मुनाफा कब तक? इंस्टेंट होम सर्विस, क्विक कॉमर्स जैसी नहीं है। यहां प्रशिक्षित कामगारों की रियल-टाइम उपलब्धता जरूरी है। वर्कर ऑनबोर्डिंग, रिटेंशन, इंसेंटिव और कस्टमर एक्विजिशन पर कंपनियां काफी खर्च कर रही हैं। पड़ोस-स्तर पर घना नेटवर्क बनाने में वक्त और पैसे, दोनों लगते हैं। निवेशक अभी ग्रोथ के लिए खर्च उठा रहे हैं, लेकिन बाजार के मैच्योर होने पर यूनिट इकोनॉमिक्स की असली परीक्षा होगी।
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