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एअर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अपने फ्यूल सरचार्ज को बढ़ा दिया है। इससे आने वाले दिनों में हवाई सफर महंगा हो जाएगा। ग्लोबल मार्केट में विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद एयरलाइन ने यह फैसला लिया है। नई दरें 8 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।
एयरलाइन के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जिससे लागत बढ़ गई है। मार्च के अंत तक जेट फ्यूल की औसत कीमत 195.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है, जो फरवरी के अंत में 99.40 डॉलर थी। इससे पहले हाल ही में इंडिगो ने भी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया था।
फ्यूल सरचार्ज क्या होता है? फ्यूल सरचार्ज वो अतिरिक्त चार्ज है जो एयरलाइन कंपनी आपको पेट्रोल/डीजल की महंगाई के कारण लगाती है। मान लीजिए हवाई यात्रा का किराया 5000 रुपए है। अगर पेट्रोल बहुत महंगा हो जाए, तो कंपनी 5000 + फ्यूल सरचार्ज (जैसे ₹500) कुल 5500 रुपए लेगी।
क्यों लगता है? क्योंकि ईंधन की कीमत बढ़ने से कंपनी का खर्चा बढ़ जाता है। ये खर्चा सीधे आपको पास कर दिया जाता है, जिसे फ्यूल सरचार्ज कहते हैं।
घरेलू रूट्स पर दूरी के हिसाब से लगेगा सरचार्ज
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए एक फ्लैट सरचार्ज व्यवस्था को खत्म कर दिया है। अब यात्रियों को दूरी के आधार पर पैसे देने होंगे। यह सरचार्ज प्रति यात्री, प्रति सेक्टर ₹299 से शुरू होकर ₹899 तक जाएगा। यह नियम एयर इंडिया के साथ-साथ उसकी सहयोगी एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस पर भी लागू होगा।
घरेलू रूट्स के लिए रिवाइज फ्यूल चार्ज
| रूट/दूरी (Km में) | रिवाइज फ्यूल चार्ज (₹ में) |
| 0 – 500 Km | ₹299 |
| 501 – 1,000 Km | ₹399 |
| 1001 – 1,500 Km | ₹549 |
| 1501 – 2,000 Km | ₹749 |
| 2,000 Km से ज्यादा | ₹899 |
इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर $280 तक की बढ़ोतरी
विदेशी रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज की दरें और भी ज्यादा रखी गई हैं क्योंकि वहां ईंधन की कीमतों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता। सार्क (SAARC) देशों के लिए यह चार्ज 24 डॉलर से शुरू होगा। वहीं, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के रूट्स के लिए यात्रियों को 280 डॉलर (करीब ₹23,000 से ज्यादा) अतिरिक्त चुकाने होंगे।
दूसरे देशों के लिए सरचार्ज की स्थिति:
- सिंगापुर: 60 डॉलर
- पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया): 50 डॉलर
- साउथ ईस्ट एशिया: 100 डॉलर
- अफ्रीका: 130 डॉलर
- यूरोप और यूके: 205 डॉलर
एयरलाइन बोली- हम पूरा बोझ यात्रियों पर नहीं डाल रहे
कंपनी का कहना है कि विमान ईंधन की लागत सिर्फ कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की वजह से नहीं, बल्कि रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ने के कारण भी बढ़ी है। एयरलाइन ने बयान में कहा, “बढ़ा हुआ सरचार्ज ईंधन की बढ़ी हुई पूरी लागत की भरपाई नहीं करता है। कंपनी अभी भी इस बोझ का एक हिस्सा खुद वहन कर रही है।” एयरलाइन बाजार की स्थितियों के आधार पर समय-समय पर इन दरों की समीक्षा करेगी।
एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च होता है जेट-फ्यूल
जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनियाभर की एयरलाइंस ने न सिर्फ टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।
तेल की कीमतों में आए इस अचानक बदलाव ने एयरलाइंस के बजट को बिगाड़ दिया है। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसी बड़ी कंपनियों ने भी साफ कर दिया है कि वे बढ़े हुए खर्च का बोझ यात्रियों पर डालेंगे।

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