उत्तर मध्य रेलवे ने माताटीला स्टेशन पर पुराने संसाधनों से मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट लगाया, जिससे यात्रियों को स्वच्छता और सुविधा मिली. यह पायलट प्रोजेक्ट अन्य स्टेशनों के लिए मिसाल बनेगा.
यह प्रोजेक्ट संसाधनों के स्मार्ट इस्तेमाल और जुगाड़ का शानदार उदाहरण है. नई सामग्री खरीदने की बजाय रेलवे के पुराने संसाधनों का उपयोग किया गया. मॉड्यूलर टॉयलेट यूनिट एक पुराने एलएचबी कोच से निकाली गई. अपशिष्ट को प्राकृतिक तरीके से साफ करने के लिए एनारोबिक बैक्टीरिया वाला बायो-टैंक जोड़ा गया. पानी की व्यवस्था के लिए 455 लीटर का पुराना ओवरहेड टैंक और सबमर्सिबल मोटर लगाई गई.
टॉयलेट और टैंक को मजबूती देने के लिए वर्कशॉप की बॉडी रिपेयर टीम ने खास धातु की संरचना तैयार की.
सबसे खास बात यह है कि पूरा काम सिर्फ दो दिनों में हो गया. मुख्य कारखाना प्रबंधक ब्रिजेश कुमार पाण्डेय ने यह चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था. सहायक कारखाना प्रबंधक जितेंद्र कुमार शर्मा की अगुवाई में टीम ने प्रभावी योजना और टीमवर्क से इस काम को समय पर पूरा कर दिखाया.यह मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट माताटीला स्टेशन पर यात्रियों को स्वच्छ, बदबू-मुक्त और सुविधाजनक शौचालय देगा.
इससे स्टेशन की सफाई बेहतर होगी, पर्यावरण को फायदा होगा और यात्री अनुभव में सुधार आएगा. यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, जो आगे अन्य स्टेशनों पर भी इसी तरह की सुविधाएं लगाने के लिए मिसाल बनेगा. उत्तर मध्य रेलवे की यह पहल दिखाती है कि कम संसाधनों में भी नवाचार से बड़ी सफलता मिल सकती है. रेलवे के अनुसार भविष्य में इस तरह के और स्टेशनों पर काम किया जाएगा, जिससे यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो. इसके लिए स्टेशनों को चिन्हित करने का काम भी जल्द किया जाएगा.
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