Ajit Pawar Investment : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजीत पवार का आज विमान हादसे में बारामती में निधन हो गया है. लैंडिंग के दौरान यह हादसा हुआ है. पवार हमेशा अपनी संपत्ति और नेट वर्थ को लेकर चर्चा में रहे. अजीत पवार की गिनती हमेशा से अमीर नेताओं में होती थी. उनकी नेटवर्थ चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के अनुसार, 2024 में उनकी कुल संपत्ति कितने करोड़ रुपये बताई गई है और इसमें चल संपत्ति और अचल संपत्ति कितनी है, ये आपको बताते हैं.
2024 में विधानसभा चुनाव के समय दिए गए हलफनामे के अनुसार, उन्होंने कुल 45.37 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई थी. इसमें चल संपत्ति यानी मूवेबल एसेट्स 8.22 करोड़ रुपये से ज्यादा थी और अचल संपत्ति यानी इमूवेबल एसेट्स 37.15 करोड़ रुपये थी.
अजीत पवार ने इन चीजों में भी किया था निवेश
इसके अलावा ट्रैक्टर, चांदी के सामान फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और बॉन्ड भी हैं. अचल संपत्ति में जमीन और मकान शामिल हैं जो महाराष्ट्र में फैले हुए हैं. पिछले पांच साल में उनकी संपत्ति में अच्छी बढ़ोतरी हुई है 2019 से 2024 तक अचल संपत्ति में करीब 10 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 2025 में महाराष्ट्र के बजट पेश करने के समय उनकी संपत्ति 124 करोड़ रुपये तक बताई गई लेकिन ये आंकड़ा चुनावी हलफनामे से अलग लगता है और शायद परिवार की कुल संपत्ति या अलग तरीके से जोड़ा गया हो सकता है. असली सही आंकड़ा चुनाव आयोग के हलफनामे से ही मिलता है जो 2024 में 45 करोड़ से ज्यादा था. 2025 या 2026 में कोई नया चुनाव नहीं हुआ है इसलिए अभी तक नया हलफनामा नहीं आया है.
अजीत पवार का 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट
वहीं, मायनेता डॉट कॉम पर चुनावी एफिडेविट के हवाले से जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक अजीत पवार करीब 124 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. जबकि उनके ऊपर देनदारी के बारे में भी इसमें बताया गया है, जो कि 21.39 करोड़ रुपये है.
अजीत पवार की संपत्ति में पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में भी बड़ा निवेश है जैसे 10 करोड़ से ज्यादा का बताया गया था. लेकिन कुल मिलाकर उनकी घोषित संपत्ति 45 करोड़ रुपये के आसपास है. इसके अलावा चल संपत्ति में दो कारें शामिल हैं -एक टोयोटा कैमरी और एक होंडा सीआरवी. अजित पवार बारामती से कई बार जीते हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में उनका बड़ा रोल निभाया. उनकी संपत्ति बढ़ने का कारण राजनीतिक करियर और परिवार का बिजनेस भी माना जा सकता है. ये आंकड़े सार्वजनिक हैं और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर चेक किए जा सकते हैं.
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