यह डील ऐसे समय में आई है जब ऐपल अपनी एआई जर्नी में देरी और इंटरनल टेक्निकल चुनौतियों से जूझ रहा था. कंपनी ने पहले 2025 में बड़ा सिरी अपग्रेड दिखाया था लेकिन इंटरनल मॉडल भरोसेमंद साबित नहीं हुए. इसके बाद ऐपल ने अलग अलग एआई कंपनियों की टेक्नोलॉजी टेस्ट की और आखिरकार गूगल जेमिनी को सबसे सक्षम प्लेटफॉर्म माना.
क्यों चुना गया गूगल जेमिनी
ऐपल और गूगल के जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया है कि गहराई से जांच के बाद गूगल की एआई टेक्नोलॉजी को ऐपल फाउंडेशन मॉडल्स के लिए सबसे बेहतर पाया गया. नया सिरी अब सिर्फ कमांड रिस्पॉन्स तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मैसेज, ईमेल और पुराने डेटा को समझकर ज्यादा पर्सनल सुझाव देने में सक्षम होगा. यह सिरी को अब तक का सबसे स्मार्ट वॉयस असिस्टेंट बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यूजर प्राइवेसी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी. एआई प्रोसेसिंग या तो डिवाइस पर होगी या ऐपल के प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट सर्वर पर चलेगी जो मैक चिप्स पर आधारित होंगे. यूजर डेटा गूगल के पब्लिक क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर से अलग रहेगा.
ओपनएआई के लिए क्यों माना जा रहा है झटका
ऐपल की पहले से ओपनएआई (OpenAI) के साथ पार्टनरशिप है जहां सिरी से कुछ कॉम्प्लेक्स क्वेरी के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT) का ऑप्शन मिलता है. लेकिन नई डील के बाद जेमिनी ऐपल की एआई स्ट्रैटेजी का कोर इंजन बन गया है. इसका मतलब है कि ओपनएआई अब मेन एआई ब्रेन की जगह एक सपोर्टिंग फीचर की भूमिका में रह गया है.
मार्केट में इसे ओपनएआई के लिए रियलिटी चेक माना जा रहा है. चैटजीपीटी की बड़ी यूजर बेस के बावजूद ऐपल ने उसे प्राइमरी इंजन नहीं चुना. हाल के समय में जीपीटी 5 (GPT 5) को लेकर मिली मिली जुली प्रतिक्रिया और बढ़ते खर्च ने भी ओपनएआई पर दबाव बढ़ाया है.
गूगल के लिए कितनी बड़ी जीत है यह डील
इस साझेदारी से जेमिनी को ऐपल के दो अरब से ज्यादा एक्टिव डिवाइसेज तक पहुंच मिलेगी. यह गूगल की एआई कमबैक स्ट्रैटेजी को पूरी तरह वैलिडेट करता है. 2025 में एआई मोमेंटम के चलते अल्फाबेट (Alphabet) के शेयरों में बड़ी तेजी देखी गई थी और यह डील निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करती है. इसके साथ ही ऐपल और गूगल का पुराना बिजनेस रिश्ता भी और गहरा हुआ है जहां गूगल सफारी में डिफॉल्ट सर्च इंजन बने रहने के लिए हर साल बड़ी रकम देता है. अब एआई में भी गूगल की टेक्नोलॉजी ऐपल के इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बन गई है.
ऐपल की एआई जर्नी में नया मोड़
ऐपल की एआई यात्रा आसान नहीं रही है. वर्ल्डवाइड डेवलपर कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए शुरुआती डेमो के बाद इंटरनल मॉडल्स में भरोसे की कमी सामने आई. इसके चलते प्रोजेक्ट में देरी हुई और टीम स्ट्रक्चर में बदलाव किए गए. इस डील से ऐपल को समय मिला है कि वह अपने इंटरनल एआई मॉडल्स को आगे डेवलप करता रहे जबकि जेमिनी फिलहाल कोर इंजन की भूमिका निभाएगा.
भविष्य में ऐपल यूजर्स को अलग अलग एआई मॉडल चुनने का ऑप्शन भी दे सकता है. लेकिन अभी के लिए गूगल जेमिनी ही सिरी और ऐपल इंटेलिजेंस की रीढ़ बनने जा रहा है.
एआई रेस का नया संदेश
यह पार्टनरशिप दिखाती है कि एआई रेस सिर्फ इनोवेशन से नहीं बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, स्केल और भरोसेमंद परफॉर्मेंस से जीती जाती है. ओपनएआई ने 2023 में एआई क्रांति को लीड किया था लेकिन अब गूगल बड़े पार्टनरशिप्स जीतकर मजबूती से वापसी कर रहा है. कुल मिलाकर ऐपल और गूगल की यह डील सिरी के लिए नई शुरुआत है, गूगल के लिए बड़ी जीत है और ओपनएआई के लिए चेतावनी कि एआई की दौड़ अभी खत्म नहीं हुई है.
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