अमेरिकी दिग्गज टेक कंपनी ऐपल (Apple) ने दिल्ली हाईकोर्ट में सीसीआई द्वारा ग्लोबल टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाने के प्रावधान को चुनौती दी है. ऐपल का तर्क है कि टर्नओवर का अर्थ केवल भारत से होने वाली कमाई होना चाहिए, न कि पूरी दुनिया का रेवेन्यू. कंपनी का कहना है कि सीसीआई का यह रुख सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है.
सीसीआई ने साल 2021 में ऐपल के खिलाफ एंटी-कॉम्पिटिटिव प्रैक्टिस (प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों) की जांच शुरू की थी. कॉम्पिटिशन एक्ट, 2002 में 2024 के संशोधन के बाद, सेक्शन 27(बी) के तहत सीसीआई को यह अधिकार मिल गया है कि वह दोषी कंपनियों पर उनके पिछले तीन सालों के ग्लोबल टर्नओवर का 10 फीसदी तक जुर्माना लगा सकता है. ऐपल इसी नए संशोधन और ग्लोबल रिकॉर्ड मांगे जाने का विरोध कर रही है.
3.41 लाख करोड़ रुपये की पेनाल्टी का डर
ऐपल की दलील है कि अगर ग्लोबल टर्नओवर के आधार पर जुर्माना लगाया जाता है, तो उसे करीब 3,41,295 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पेनाल्टी चुकानी पड़ सकती है. कंपनी का कहना है कि यह कैलकुलेशन वित्त वर्ष 2022, 2023 और 2024 के ग्लोबल टर्नओवर पर आधारित है, जो तर्कसंगत नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
ऐपल ने दिल्ली हाईकोर्ट को दिए जवाब में सुप्रीम कोर्ट के ‘एक्सेल क्रॉप’ मामले का जिक्र किया. कंपनी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि जुर्माने के लिए टर्नओवर का मतलब संबंधित टर्नओवर (Relevant Turnover) होना चाहिए, न कि ग्लोबल टर्नओवर. ऐपल का आरोप है कि सीसीआई ने इस संशोधन के जरिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अमान्य करने की कोशिश की है, जो संविधान के आर्टिकल 50 (सेपरेशन ऑफ पावर) का उल्लंघन है.
ऐपल की मुख्य दलीलें
- टर्नओवर का मतलब केवल संबंधित बिजनेस से होना चाहिए, ग्लोबल रेवेन्यू से नहीं.
- सीसीआई का नया प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का अनादर करता है.
- ग्लोबल फाइनेंशियल रिकॉर्ड मांगना कंपनी की प्राइवेसी और संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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