बैंकिंग वकीलों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चोरी बैंक स्टाफ की सीधी मिलीभगत या घोर लापरवाही से नहीं हुई है, तो बैंक किसी भी मुआवजे की जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लेते हैं. आरबीआई के मास्टर सर्कुलर के अनुसार, बैंक केवल तभी जिम्मेदार हैं जब नुकसान बैंक कर्मचारियों की गलती से हुआ हो. सामान्य चोरी या डकैती की स्थिति में बैंक मुआवजा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं.
बैंक लॉकर में हुई चोरी की प्रमुख घटनाएं
दिल्ली – पंजाब नेशनल बैंक (करोल बाग ब्रांच)
साल 2025 के आखिरी महीनों में दिल्ली के करोल बाग स्थित पीएनबी की शाखा में एक खौफनाक वारदात हुई, जहाँ चोरों ने एक ही रात में 12 लॉकरों को अपना निशाना बनाया. चोरों ने गैस कटर का इस्तेमाल करके बेहद सफाई से लॉकरों को काट डाला और करोड़ों रुपये के सोने के गहने व नकदी लेकर फरार हो गए. इस घटना में कई परिवारों ने अपनी पीढ़ियों की जमा-पूंजी और पुश्तैनी गहने खो दिए. बैंक ने इस पर अपना पल्ला झाड़ते हुए दावा किया कि उनकी जिम्मेदारी सीमित है और वे चोरी के लिए उत्तरदायी नहीं हैं.
मुंबई – अंधेरी ब्रांच (प्राइवेट सेक्टर बैंक)
दिसंबर 2025 में मुंबई के अंधेरी स्थित एक निजी बैंक में मरम्मत (Renovation) के काम के दौरान सुरक्षा में बड़ी चूक देखी गई. इस दौरान 8 लॉकरों के साथ छेड़छाड़ की गई और लगभग 2.5 करोड़ रुपये के गहने गायब हो गए. बैंक ने अपनी किसी भी लापरवाही से साफ इनकार कर दिया और सारा दोष रिनोवेशन करने वाले बाहरी ठेकेदार पर मढ़ दिया. इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और जांच अब भी जारी है.
बेंगलुरु – कई ब्रांचों में सेंधमारी
साल 2024 और 2025 के बीच बेंगलुरु की कम से कम तीन अलग-अलग बैंक शाखाओं में लॉकर के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं रिपोर्ट की गईं. इन सभी मामलों में एक जैसा पैटर्न देखा गया, जिससे पुलिस को संदेह है कि इन चोरियों में बैंक के अंदरूनी स्टाफ या वहां काम करने वाले ठेकेदारों की मिलीभगत हो सकती है. इन घटनाओं ने साबित किया कि लॉकर के लिए खतरा केवल बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से भी हो सकता है.
एक्सपर्ट्स की सलाह और बचाव के तरीके
गहनों का बीमा कराएं
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बैंक लॉकर में सामान रखने के बाद बीमा की जरूरत नहीं है, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती है. बैंक केवल लॉकर की जगह का किराया लेते हैं, उसमें रखे सामान की सुरक्षा का इंश्योरेंस नहीं करते. इसलिए, आपको अपनी ज्वेलरी के लिए अलग से ‘ज्वेलरी इंश्योरेंस’ या हाउसहोल्डर पॉलिसी लेनी चाहिए. यह पॉलिसी चोरी या डकैती की स्थिति में आपको असली वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है. बैंक से हर्जाना मिलना बहुत मुश्किल प्रक्रिया है, लेकिन इंश्योरेंस होने पर क्लेम मिलना आसान होता है.
सारा सोना एक जगह न रखें
अपनी पूरी जमा-पूंजी या पुश्तैनी गहनों को एक ही बैंक के एक ही लॉकर में रखना जोखिम भरा हो सकता है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आपको अपने गहनों को अलग-अलग बैंकों या अलग-अलग ब्रांचों के लॉकर में बांटकर रखना चाहिए. जोखिम का यह विविधीकरण (Diversification) आपको बड़े नुकसान से बचाता है. अगर किसी एक ब्रांच में सुरक्षा में सेंध लगती है, तो आपकी पूरी संपत्ति एक साथ नहीं डूबेगी और आप बड़े आर्थिक संकट से बच जाएंगे.
एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें
लॉकर लेते समय बैंक आपसे जिस एग्रीमेंट पर साइन करवाता है, उसे बिना पढ़े कभी न छोड़ें. इसके ‘लायबिलिटी क्लॉज’ (Liability Clause) को बहुत बारीकी से देखें, क्योंकि इसमें बैंक की जिम्मेदारी की सीमाएं लिखी होती हैं. अक्सर इसमें साफ लिखा होता है कि चोरी, डकैती या बैंक के नियंत्रण से बाहर किसी भी कारण से हुए नुकसान के लिए बैंक जिम्मेदार नहीं होगा. साथ ही, साल में कम से कम दो बार अपना लॉकर जरूर ऑपरेट करें ताकि बैंक को पता रहे कि आप सतर्क हैं.
हाई-टेक ब्रांच चुनें
सभी बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था एक जैसी नहीं होती, इसलिए लॉकर के लिए हमेशा आधुनिक तकनीक वाली ब्रांच ही चुनें. ऐसी ब्रांचों को प्राथमिकता दें जहां 24×7 सीसीटीवी निगरानी, मजबूत स्ट्रॉन्ग रूम और बायोमेट्रिक एक्सेस जैसी सुविधाएं हों. बेसमेंट में स्थित लॉकर रूम से बचना चाहिए क्योंकि वहां सीलन या रिनोवेशन के दौरान सेंधमारी का खतरा ज्यादा रहता है. लॉकर लेने से पहले ब्रांच मैनेजर से सुरक्षा ऑडिट और सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के बैकअप के बारे में जरूर पूछें.
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