Budget Expenditure : सरकार ने इस बार के बजट को पूरी तरह अर्थव्यवस्था को समर्पित कर दिया है. वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में पूरा जोर आर्थिक प्रगति पर दिया और यही कारण है कि इस बार बजट खर्च भी सबसे ज्यादा रहा है.
वित्तमंत्री ने पिछले साल 1 फरवरी को पेश बजट में करीब 50 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान किया था. हालांकि इसमें थोड़ा संशोधन करके इस बार 49.6 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. लेकिन, 2026-27 के लिए जारी बजट में कुल खर्च का अनुमान करीब 53.5 लाख करोड़ रुपये बताया गया है. यह पिछले साल के बजट से भी करीब 4 लाख करोड़ रुपये ज्यादा है.
कहां से आएगा खर्च करने के लिए पैसा
सरकार ने बजट में अनुमान लगाया है कि उसे बिना कर्ज लिए ही अगले वित्तवर्ष 2026-27 में करीब 36.5 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होंगे. इसमें केंद्र सरकार को मिलने वाला नेट टैक्स कलेक्शन करीब 28.7 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. बाकी बाजार बाजार उधारी से पूरा किया जाएगा. सरकार का अनुमान है कि अगले वित्तवर्ष में सिक्योरिटीज के जरिये बाजार से 11.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे, जबकि कुल बाजार उधारी करीब 17.2 लाख करोड़ रुपये रहेगी.
पिछले साल की कमाई का अनुमान बदला
सरकार ने पिछले बजट में चालू वित्तवर्ष के लिए बिना कर्ज के ही जिस राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया था, उसे संशोधित करके 34 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसमें केंद्र को टैक्स से 26.7 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. पहले तो सरकार ने करीब 50.65 लाख करोड़ रुपये का बजट जारी किया था, लेकिन अब उसे संशोधित करके 49.6 लाख करोड़ रुपये कर दिए हैं. इसमें पूंजी व्यय करीब 26.1 लाख करोड़ रहा.
राजकोषीय घाटा कितना होगा
वित्तमंत्री ने बताया है कि अगले वित्तवर्ष 2026-27 में देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है. वर्ष 2025-26 के बजट में संशोधित राजकोषीय घाटा 2025-26 के बजट अनुमान जीडीपी के 4.4 फीसदी रखा है. कर्ज की बात करें तो सरकार का कुल कर्ज देश की जीडीपी का चालू वित्तवर्ष में 56.1 फीसदी है, लेकिन इसे अगले वित्तवर्ष 2026-27 में घटाकर जीडीपी का 55.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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