बजट 2026 के तहत प्रस्तावित रेयर अर्थ कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की तटरेखा पर मौजूद मोनाजाइट रेत का पूर्ण दोहन करना है. इन राज्यों में वर्तमान में इल्मेनाइट और जिरकॉन जैसे खनिजों का खनन तो हो रहा है, लेकिन रेयर अर्थ तत्वों की पूरी वैल्यू चेन (शुद्धिकरण और मैग्नेट निर्माण) अभी विकसित होनी बाकी है. नए कॉरिडोर के जरिए सरकार इन राज्यों को रिसर्च, माइनिंग और विनिर्माण के हब के रूप में विकसित करेगी, जिससे भारत 2030 तक इस रणनीतिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा.
ये चारों राज्य अपनी विशाल समुद्री तटरेखा के कारण ‘बीच सैंड मिनरल्स’ (BSM) के मामले में बेहद संपन्न हैं. इन राज्यों की रेत में मोनाजाइट जैसे कीमती खनिज पाए जाते हैं, जो स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और मिसाइलों के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं. वर्तमान में इन क्षेत्रों में IREL (India) Limited मुख्य रूप से सक्रिय है, जो परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत इन खनिजों का प्रबंधन करती है. बजट 2026 का लक्ष्य अब इस कच्चे माल को अंतिम उत्पाद, जैसे कि स्थायी चुंबक (Permanent Magnets), में बदलने के लिए निजी निवेश को आकर्षित करना है.
| राज्य | मुख्य खनिज क्षेत्र (Sites) | वर्तमान में क्या निकलता है? | रेयर अर्थ का मुख्य स्रोत |
| ओडिशा | छतरपुर (गंजम district) – OSCOM यूनिट | इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन, सिलीमेनाइट और गार्नेट। | मोनाजाइट: यहाँ भारत का सबसे बड़ा प्रोसेसिंग प्लांट (REEP) है। |
| केरल | चावरा (कोल्लम district) और कोच्चि | भारी खनिज रेत (Beach Sand Minerals) और टाइटेनियम डाइऑक्साइड। | मोनाजाइट: यहाँ की रेत थोरियम और स्कैंडियम से भरपूर है। |
| आंध्र प्रदेश | श्रीकाकुलम से नेल्लोर (तटीय पट्टी) | इल्मेनाइट, जिरकॉन और अन्य तटीय खनिज। | मोनाजाइट: भारत के कुल भंडार का लगभग 30-35% हिस्सा यहीं है। |
| तमिलनाडु | कन्याकुमारी (मनवलकुरुचि) और तूतीकोरिन | इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन और सिलीमेनाइट। | मोनाजाइट: यहाँ बड़े पैमाने पर माइनिंग और नई प्रोसेसिंग यूनिट्स प्रस्तावित हैं। |
अगर राज्यवार वर्तमान स्थिति को देखें, तो ओडिशा का छतरपुर (OSCOM) वर्तमान में सबसे उन्नत केंद्र है जहां इल्मेनाइट और जिरकॉन के साथ मोनाजाइट की प्रोसेसिंग भी हो रही है. आंध्र प्रदेश के पास भारत का सबसे बड़ा मोनाजाइट भंडार (लगभग 3.78 मिलियन टन) है, जहाँ नेल्लोर जैसे क्षेत्रों में नई प्रोसेसिंग यूनिट्स पर काम चल रहा है. केरल और तमिलनाडु भी अपने समृद्ध तटीय बेल्ट से भारी मात्रा में इल्मेनाइट और रूटाइल का उत्पादन कर रहे हैं, जो टाइटेनियम बनाने के काम आता है.
बनेंगे रिसर्च-डेवलपमेंट हब
ये कॉरिडोर केवल माइनिंग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां रिसर्च और डेवलपमेंट हब भी बनाए जाएंगे. सरकार का फोकस ‘वैल्यू चेन’ के उस हिस्से पर है जहाँ भारत फिलहाल पीछे है, यानी खनिजों को अलग करके उन्हें शुद्ध ऑक्साइड में बदलना. इलेक्ट्रिक कारों की मोटरों और विंड टर्बाइनों में इस्तेमाल होने वाले नियोडिमियम और प्रासेओडिमियम जैसे तत्वों के लिए ये चार राज्य भविष्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ साबित होने वाले हैं.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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