सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स स्कीम की शुरुआत वर्ष 2015 में भारत सरकार ने की थी. इन बॉन्ड्स को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जारी करता है. इसका मकसद था कि लोग फिजिकल गोल्ड खरीदने की बजाय कागजी रूप में सोने में निवेश करें. ऐसा करने से निवेशकों को दोहरा फायदा मिलता था. एक तो सोने की कीमत बढ़ने का लाभ, और दूसरा हर साल 2.5 प्रतिशत ब्याज. पहले यह ब्याज दर 2.75 प्रतिशत थी. सबसे बड़ी बात यह थी कि अगर निवेशक बॉन्ड को 8 साल की मैच्योरिटी तक रखते, तो उन्हें कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं देना पड़ता था. SGB की यही विशेषताएं इसे एक आकर्षक निवेश बना देती थीं.
सभी SGB निवेशकों को नहीं मिलेगी टैक्स छूट
1 फरवरी 2026 को पेश किए गए यूनियन बजट 2026 में इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया गया है. नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. अब टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जो बॉन्ड सीधे मूल इश्यू यानी प्राइमरी मार्केट से खरीदेंगे और उसे पूरे 8 साल तक बिना बेचे होल्ड करेंगे. जो लोग NSE या BSE जैसे सेकंडरी मार्केट से SGB खरीदते हैं, उन्हें अब मैच्योरिटी पर भी टैक्स देना होगा.
नए नियम के अनुसार, यदि सेकंडरी मार्केट से खरीदा गया एसजीबी 12 महीने से ज्यादा रखा गया है, तो उस पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा और इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलेगा. अगर 12 महीने से पहले बेचते हैं, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन आपके इनकम स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा. पहले पांच साल बाद समय से पहले रिडेम्प्शन पर भी टैक्स छूट मिल जाती थी, लेकिन अब वह भी खत्म कर दी गई है.
आखिर क्यों लिया सरकार ने ये फैसला?
सरकार के इस कदम को गोल्ड इंपोर्ट कम करने और राजकोषीय घाटा संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. 2015 से अब तक सोने की कीमतों में 150 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. इस वजह से सरकार पर एसजीबी रिडेम्प्शन का बोझ करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि निवेशकों का कहना है कि शुरुआत में इस स्कीम को टैक्स-फ्री विकल्प के रूप में प्रचारित किया गया था, इसलिए अब नियम बदलना उनके भरोसे को चोट पहुंचाता है.
निवेशकों को कितने का लॉस?
इसे दाहरण से समझते हैं. पहला SGB इश्यू नवंबर 2015 में था. मान लीजिए किसी निवेशक ने तब 1 लाख रुपये लगाए थे. उस समय सोने का भाव लगभग 2,684 रुपये प्रति ग्राम था. इस हिसाब से उसे करीब 37 ग्राम सोना मिला. आज यदि औसतन 15,300 रुपये प्रति ग्राम का भाव मानें तो कुल कीमत लगभग 5,70,000 रुपये बैठती है. पुराने नियम में यह पूरा लाभ टैक्स-फ्री मिलता. अब ब्याज भी जोड़ दें तो कुल रकम करीब 5,85,000 रुपये तक पहुंचती. ऐसे में 1 लाख रुपये के निवेश पर मुनाफा लगभग 4,85,000 रुपये होता.
लेकिन नए नियम के तहत यदि यह निवेश सेकंडरी मार्केट से खरीदा गया था, तो 4,70,000 रुपये के कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत यानी करीब 58,750 रुपये टैक्स देना होगा. टैक्स कटने के बाद कुल रकम करीब 5,26,250 रुपये रह जाएगी. यानी मुनाफे में सीधी कमी दिखेगी. यही वजह है कि बजट के बाद सेकंडरी मार्केट में एसजीबी की कीमतों में काफी गिरावट देखने को मिली.
सरकार चाहती है कि ट्रेडिंग कम हो और निवेशक लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखें. लेकिन निवेशकों के सामने अब फैसला आसान नहीं है. जिन्हें लिक्विडिटी चाहिए या जिन्होंने सेकंडरी मार्केट से ऊंचे प्रीमियम पर खरीदारी की है, उनके लिए गणित बदल चुका है.
क्या कहते हैं आम लोग?
सरकार के इस कदम से निवेशक काफी नाराज नजर आ रहे हैं. ये लोग मुख्य रूप से “ट्रस्ट तोड़ने”, “धोखा” और “निवेशकों का नुकसान” जैसी बातें कर रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर योगेंद्र सिंह सिकरवार (@ProfYogendra) ने लिखा, “इस बार वाले बजट में सरकार यह नियम लेकर आई है कि जिन्होंने भी SGB इश्यू के समय RBI से नहीं लिया है, उनको रिडेंप्शन के समय कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ेगा. ऐसा करके भी सरकार अपना हित साधना चाह रही है और निवेशक का नुकसान करना चाहती है. ये नियम इश्यू खुलने के समय नहीं बनाए थे, अब लाए हैं.”
कुछ और लोगों ने लिखा-
“बजट 2026 ने SGB निवेशकों को लूट लिया! पहले टैक्स फ्री बताया, अब टैक्स लगा दिया. सरकार छोटे निवेशक का पैसा देख नहीं सकती?”
“#SGB #Budget2026 धोखाधड़ी है! जो लोग स्टॉक एक्सचेंज से खरीदे थे, उनका मुनाफा अब टैक्स में कटेगा. ट्रस्ट ब्रेक हो गया.”
“सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में पैसा लगाया था टैक्स बचाने के लिए, अब बजट ने सब खत्म कर दिया. सरकार सिर्फ अपना फायदा देखती है!..”
अतुल सिंह (@Atulsingh_asan) ने लिखा, “सरकार सोने की तेजी रोक सकती है एक मिनट में, लेकिन करती नहीं. बजट में SGB टैक्स लगा दिया, ताकि छोटा निवेशक रोए और बड़ा ज्वैलर हंसे. मिडिल क्लास की शादी का सीजन, सोना महंगा + टैक्स = परफेक्ट कॉम्बो!
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.