घर खरीदना जिंदगी का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला हो सकता है. लेकिन ज्यादा महंगा घर भविष्य की परेशानी भी बन सकता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि लोन की सीमा नहीं, अपनी क्षमता देखना जरूरी है. सही योजना के साथ लिया गया फैसला ही सुकून देता है.
सैलरी के हिसाब से घर चुनें, वरना EMI बना देगी जिंदगी मुश्किल.(Image:AI)
आय और EMI का सही संतुलन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घर की कीमत आपकी सालाना टेक-होम इनकम के पांच गुना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर आप इससे आगे बढ़ते हैं तो कर्ज के जाल में फंसने का खतरा बढ़ जाता है. दूसरा अहम नियम है कि आपकी मासिक EMI, घर की कुल नेट इनकम के 35 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. इससे ज्यादा EMI होने पर आपात स्थिति, मेडिकल जरूरत या नौकरी में बदलाव जैसी परिस्थितियों में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.
मजबूत बचत और इमरजेंसी फंड जरूरी
घर खरीदने से पहले आपके पास उस घर की कीमत का कम से कम 50 फीसदी बचत होनी चाहिए. यह सिर्फ डाउन पेमेंट के लिए नहीं, बल्कि खरीद के बाद वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है. ज्यादातर एक्सपर्ट्स 35:15 का फॉर्मूला सुझाते हैं. यानी घर की कीमत का 35 फीसदी डाउन पेमेंट में लगाएं और 15 फीसदी रकम इमरजेंसी फंड के रूप में सुरक्षित रखें. यह फंड किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में सुरक्षा कवच का काम करेगा.
बीमा और समय की योजना
होम लोन लेने से पहले परिवार के लिए कम से कम 50 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस और घर की कीमत के बराबर टर्म लाइफ इंश्योरेंस होना चाहिए. इससे किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार पर बोझ नहीं पड़ेगा. साथ ही, घर तभी खरीदें जब कम से कम पांच साल तक उसमें रहने की योजना हो. अगर दो-तीन साल में स्थानांतरण की संभावना है तो किराए पर रहना ज्यादा समझदारी भरा विकल्प हो सकता है, क्योंकि ट्रांजैक्शन लागत और ब्याज खर्च काफी ज्यादा होते हैं.
उदाहरण से समझें पूरा गणित
मान लीजिए आप 1 करोड़ रुपये का घर खरीदना चाहते हैं. ऐसे में परिवार की सालाना आय कम से कम 25 लाख रुपये होनी चाहिए और करीब 50 लाख रुपये की बचत पहले से मौजूद हो. इसमें से 35 लाख रुपये डाउन पेमेंट में और 15 लाख रुपये इमरजेंसी फंड के रूप में अलग रखें. अगर यह संभव नहीं है तो बेहतर है कि पहले अपनी आय बढ़ाने और कौशल सुधारने पर ध्यान दें. एक्सपर्ट्स का संदेश साफ है- वित्तीय स्वतंत्रता घर खरीदने से नहीं, बल्कि बिना डर और दबाव के उसे चुकाने की क्षमता से आती है.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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