इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित बैगेज नियम 2026 के अनुसार, दुबई से भारत सोना लाने के नियम काफी सख्त हैं. नांगिया ग्लोबल के संस्थापक सूरज नंगिया बताते हैं कि ड्यूटी-फ्री छूट केवल उन यात्रियों को मिलती है जो एक वर्ष से अधिक समय विदेश में रह चुके हैं. ऐसे यात्री 40 ग्राम (महिलाओं के लिए) और 20 ग्राम (पुरुषों के लिए) तक के सोने के आभूषण ड्यूटी-फ्री ला सकते हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि ड्यूटी-फ्री छूट केवल आभूषणों पर मिलती है. यदि आप सोने के सिक्के या ईंटें (Bars) लाते हैं, तो आपको पहले ग्राम से ही कस्टम ड्यूटी चुकानी होगी.
पर्यटक को नहीं मिलती छूट
यदि आप केवल घूमने गए हैं तो आपको किसी भी मात्रा पर टैक्स देना होगा. रिद्धिसिद्धि बुलियंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी कहते हैं कि छोटे समय के लिए यात्रा करने वाले पर्यटकों को ड्यूटी-फ्री सोना नहीं मिलता. किसी भी मात्रा पर ड्यूटी लगेगी. सभी सोने की खरीद का वैध बिल होना चाहिए और कस्टम में घोषणा करनी जरूरी है.
दुबई में सोना सस्ता क्यों है?
नांगिया का कहना है कि दुबई में सोने की कीमतें भारत की तुलना में आमतौर पर 5% से 7% तक कम होती हैं. इसका मुख्य कारण टैक्स संरचना है. भारत में सोने के आयात पर भारी कस्टम ड्यूटी और 3% जीएसटी (GST) लगता है, जबकि दुबई एक ग्लोबल ट्रेडिंग हब है जहाँ बुलियन पर आयात शुल्क नहीं लगता. इसके अलावा, दुबई के गोल्ड सूक में मेकिंग चार्जेस पर मोलभाव की बेहतर गुंजाइश होती है और पर्यटकों को खरीदारी पर VAT रिफंड का लाभ भी मिल जाता है.
कोठारी कहते हैं कि भारत द्वारा आयात शुल्क 6% करने के बाद भी दुबई बड़े निवेश या बुलियन खरीद के लिए सस्ता पड़ सकता है. पर्यटकों को VAT रिफंड भी मिल सकता है, हालांकि फायदा मुद्रा विनिमय दर और समय पर निर्भर करता है.
दुबई से सोना लाने पर कौन से टैक्स लगते हैं?
ड्यूटी-फ्री सीमा से अधिक सोना लाने पर कस्टम ड्यूटी लगती है जो करीब 3% से शुरू होकर 6% और 10% तक. सोने की बार या सिक्कों पर योग्य यात्रियों के लिए 6% ड्यूटी लग सकती है, जबकि कम अवधि के यात्रियों को 36–38.5% तक ड्यूटी देनी पड़ सकती है. भारत में बेचने पर 3% जीएसटी और मुद्रा विनिमय लागत भी शामिल होती है. बाद में बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स भी लागू हो सकता है.
क्या दुबई से सोना लाने में जोखिम हैं?
सोने की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से मुनाफा कम हो सकता है. कानूनी जोखिम भी हैं. यदि सोना घोषित नहीं किया गया तो उसे जब्त किया जा सकता है और भारी जुर्माना लग सकता है. भारतीय ज्वेलर्स आयातित सोने का रेट भी कम देते हैं. नियमों और टैक्स में बदलाव भी आपके लाभ को प्रभावित कर सकते हैं.
क्या 20 लाख रुपये का सोना लाना लाभदायक है?
कोठारी के अनुसार, व्यक्तिगत स्तर पर यह लाभदायक रणनीति नहीं है. कस्टम ड्यूटी, जीएसटी, मुद्रा विनिमय और रीसेल डिस्काउंट के बाद मार्जिन बहुत कम रह जाता है.
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