उन्होंने यह भी कहा कि नए बिल के तहत टिप, ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी पर टैक्स नहीं लगेगा. हालांकि, एपी की रिपोर्ट के मुताबिक यह छूट सभी को नहीं मिलेगी. कम आय वाले बुजुर्ग, 65 साल से पहले लाभ लेने वाले और तय आय सीमा से ऊपर के लोग इस कटौती का फायदा नहीं उठा पाएंगे.
टैरिफ का 86-94% असर अमेरिकी लोगों ने झेला
एपी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैरिफ से होने वाली कमाई अमेरिका के बजट घाटे को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है. Congressional Budget Office के अनुमान के अनुसार, टैरिफ से 10 साल में करीब 3 ट्रिलियन डॉलर जुटाए जा सकते थे, जो 4.7 ट्रिलियन डॉलर के टैक्स कटौती खर्च को कवर करने के लिए काफी नहीं है. पिछले साल अमेरिका का बजट घाटा(Annual Budget Deficit) 1.78 ट्रिलियन डॉलर था. ट्रंप का कहना है कि टैरिफ का पैसा विदेशी देश देते हैं, लेकिन अध्ययनों के अनुसार इसका ज्यादातर बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं और कंपनियों पर पड़ता है. फेडरल बैंक न्यू यॉर्क की एक स्टडी के मुताबिक, टैरिफ का 86-94% असर अमेरिकी लोगों ने झेला. वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ से पिछले साल करीब 175 अरब डॉलर की वसूली हुई थी.
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के बड़े पैमाने पर लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. ये फैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा कि टैक्स और ड्यूटी लगाने का पावर सिर्फ कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. ये ट्रंप की इकोनॉमिक पॉलिसी का बड़ा झटका था, क्योंकि उनके टैरिफ से 134 बिलियन डॉलर तक का राजस्व जुटाया गया था.
स्पीच के दौरान चार जस्टिस वहां मौजूद थे, जिनमें चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स, जस्टिस एमी कोनी बैरेट और जस्टिस एलेना कागन शामिल थे, जो बहुमत में थे. ट्रंप ने कहा कि ये फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उन्होंने दावा किया कि अब दूसरे कानूनों के तहत टैरिफ जारी रहेंगे. इसके बाद उन्होंने ग्लोबली 15 फीसदी का टैरिफ लगाने का ऐलान किया.
अमेरिका की जनता पर पड़ेगा असर
अमेरिकी जनता पर इसका असर क्या होगा, ये बड़ा सवाल है. ट्रंप कहते हैं कि टैरिफ से विदेशी देश पैसे देंगे और अमेरिका मजबूत होगा. लेकिन कई एक्सपर्ट और पोल्स कहते हैं कि टैरिफ से सामान महंगा होता है, जो आम अमेरिकी की जेब पर बोझ डालता है. कंपनियां अब रिफंड की मांग करने की तैयारी कर सकती हैं और इससे मार्केट में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. ट्रंप की ये जिद दिखाती है कि वो अपनी ट्रेड पॉलिसी पर अड़े हैं, चाहे कोर्ट कुछ भी कहे. टैरिफ के बढ़ने से अमेरिका में महंगाई के भी बढ़ने का डर सता रहा है.
ट्रंप कोर्ट के फैसले को चाहे जितनी बार “unfortunate” कहकर नजरअंदाज करने की कोशिश कर करें लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर यूएस पर ही देखने को मिलेगा. ट्रंप ने इन टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देना बताया गया था, वहीं JPMorgan Chase Institute की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले अमेरिकी व्यवसायों का टैरिफ भुगतान लगभग तीन गुना तक बढ़ गया है. इसके अलावा समाचार एजेंसी Associated Press (एपी) ने इस अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि टैरिफ नीतियों का अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है.
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