कोर्ट की बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता थे. जस्टिस विक्रम नाथ ने केंद्र की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा, ‘हम निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेंगे. कुंभ और अन्य त्योहारों के दौरान यात्रियों के शोषण को ही देख लीजिए. दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए पर नजर डालिए.’ जस्टिस मेहता ने हल्के अंदाज में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि शायद अहमदाबाद के किराए में बढ़ोतरी नहीं हुई होगी, लेकिन जोधपुर जैसे गंतव्यों पर किराए में भारी वृद्धि हुई है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीजीसीए से जवाब मांगा है कि इस पर क्या किया जा सकता है. कोर्ट ने बाध्यकारी दिशानिर्देश बनाने की बात कही ताकि एयरलाइंस मनमानी न कर सकें.
सख्त नियमों से लोगों को मिलेगा फायदा
याचिका में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा है कि सभी निजी एयरलाइंस ने बिना कोई ठोस वजह बताए इकोनॉमी क्लास में मुफ्त चेक-इन बैगेज को 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दिया है. पहले यह टिकट का हिस्सा था, लेकिन अब इसे अलग से चार्ज करके नया राजस्व स्रोत बना लिया है. नई नीति में सिर्फ एक बैग की अनुमति है और जो यात्री बैगेज नहीं लेते, उन्हें कोई छूट या मुआवजा नहीं मिलता, जो इसकी मनमानी और भेदभावपूर्ण प्रकृति दिखाता है.
पिछले साल 17 नवंबर को कोर्ट ने केंद्र, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी किया था. अब सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली तारीख 23 फरवरी तय की है. तब तक सरकार और डीजीसीए जवाब दाखिल करेंगे.
अगर कोर्ट सख्त नियम बनवाए तो त्योहारों में टिकट बुक करना थोड़ा सस्ता और आसान हो जाएगा. आम लोग जो परिवार से मिलने या धार्मिक जगहों पर जाते हैं, उनके लिए यह बहुत अच्छी खबर होगी. अदालत की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में एयरलाइंस की प्राइसिंग पॉलिसी पर कड़ी नजर रखी जा सकती है. अगर सुप्रीम कोर्ट हवाई किराए को लेकर सख्त नियम लागू करवाता है, तो इसका सीधा फायदा आम यात्रियों को बड़े धार्मिक आयोजनों और आपात स्थितियों में आखिरी वक्त पर टिकट बुक करने वालों को राहत मिलेगी.
अचानक बढ़े किराए पर लगेगा फुल स्टॉप
नियम बनने से एयरलाइंस को किराया तय करने में ट्रांसपरेंसी बरतनी होगी और मनमाने तरीके से दाम बढ़ाने पर रोक लग सकती है. इससे यात्रियों को पहले से यह अंदाजा होगा कि टिकट की अधिकतम कीमत कितनी हो सकती है. साथ ही, अचानक बढ़े किराए के कारण लोगों को यात्रा टालने या दूसरे साधनों पर निर्भर होने की मजबूरी भी कम होगी.
अदालत की सख्त टिप्पणी से यह भी उम्मीद जगी है कि सरकार और डीजीसीए एयरलाइंस की प्राइसिंग पॉलिसी पर नियमित निगरानी रखेंगे और इसपर एक बड़ा एक्शन प्लान बन सकता है. अगर ऐसा होता है तो न सिर्फ किराए नियंत्रित होंगे, बल्कि अतिरिक्त शुल्क, बैगेज चार्ज और अन्य सुविधाओं के नाम पर की जाने वाली मनमानी पर भी लगाम लग सकती है.
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