एफआईसीसीआई (FICCI) ने बजट 2026 से पहले सरकार से इनकम टैक्स अपील में फंसे लाखों मामलों का बैकलॉग खत्म करने की मांग की है. औद्योगिक निकाय का कहना है कि बकाया टैक्स विवाद कंपनियों की फाइनेंशियल प्लानिंग और वैल्यूएशन पर असर डाल रहे हैं. साथ ही एफआईसीसीआई ने सीमा शुल्क नियमों में बदलाव और कस्टम्स एडवांस रूलिंग सिस्टम के विस्तार की भी सिफारिश की है.
एफआईसीसीआई का मानना है कि टैक्स विवादों का लंबा बैकलॉग कंपनियों और सरकार दोनों के लिए नुकसानदेह है. एक तरफ कंपनियों का पैसा अपील प्रक्रिया में फंस जाता है और दूसरी तरफ सरकार को समय पर रेवेन्यू नहीं मिल पाता है. इसी वजह से बजट में ठोस समाधान की जरूरत बताई गई है.
इनकम टैक्स अपील में लाखों मामले लंबित
एफआईसीसीआई ने कहा है कि आयकर आयुक्त अपील के सामने बहुत बड़ी संख्या में केस बकाया हैं. एक अप्रैल 2025 तक करीब 5.4 लाख अपील केस लंबित थे. इन मामलों में लगभग 18.16 लाख करोड रुपये की विवादित राशि शामिल है. औद्योगिक निकाय का कहना है कि नए फेसलेस अपील सिस्टम की सफलता के लिए जरूरी है कि इन बकाया मामलों को तेजी से निपटाया जाए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो टैक्सपेयर्स को डिमांड और रिफंड दोनों में ब्लॉकेज का सामना करना पड़ेगा.
सरकारी लक्ष्य और जमीनी चुनौती
2025 से 26 के सेंट्रल एक्शन प्लान के तहत सरकार ने 2 लाख मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा इंटरनेशनल टैक्स, ट्रांसफर प्राइसिंग और फेसलेस अपील जैसे अलग अलग चैनलों से करीब 10 लाख करोड रुपये की विवादित मांग को सुलझाने का टारगेट है. एफआईसीसीआई का कहना है कि बिना अतिरिक्त क्षमता बढ़ाए और अलग अलग ट्रैक व टाइमलाइन तय किए बैकलॉग खत्म करना मुश्किल रहेगा.
कंपनियों की वैल्यूएशन पर पड़ रहा असर
एफआईसीसीआई के मुताबिक बकाया टैक्स मुकदमे कंपनियों की किताबों में कंटिंजेंट लायबिलिटी के रूप में दिखते हैं. जब भारतीय प्रमोटर विदेशी निवेशकों को हिस्सेदारी बेचते हैं तो यही बकाया मामले वैल्यूएशन को कम कर देते हैं. इसके अलावा ज्यादा केस लंबित रहने से सरकार को भी संभावित रेवेन्यू समय पर नहीं मिल पाता है.
अपील के दौरान डिमांड पर राहत की मांग
औद्योगिक संगठन ने सुझाव दिया है कि अपील लंबित रहने के दौरान टैक्स डिमांड पर पूरी रोक लगाने से जुड़ी व्यवस्था को ज्यादा तर्कसंगत बनाया जाए. इससे टैक्सपेयर्स की वर्किंग कैपिटल ब्लॉकेज कम होगी और बिना रेवेन्यू हितों को नुकसान पहुंचाए सिस्टम ज्यादा स्मूद बनेगा.
सीमा शुल्क सुधार पर भी जोर
एफआईसीसीआई ने सीमा शुल्क नियमों में बदलाव की भी मांग की है. संगठन का कहना है कि अग्रिम निर्णयों के लिए कस्टम्स एडवांस रूलिंग अथॉरिटी के ऑफिस देश के और शहरों में खोले जाने चाहिए. फिलहाल इसके ऑफिस केवल नई दिल्ली और मुंबई में हैं जबकि चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे पोर्ट्स से बड़ी संख्या में ट्रेड से जुड़े आवेदन आते हैं.
ट्रेड को आसान बनाने की सिफारिश
एफआईसीसीआई ने सेल्फ डिक्लेयरिंग एक्सटेंशन की अनुमति देने की मांग भी रखी है. इससे ट्रेड में स्पष्टता बढ़ेगी, अनुपालन का बोझ कम होगा और सीमा शुल्क से जुड़े मुकदमे घटेंगे. बजट 2026 से पहले एफआईसीसीआई (FICCI) की ये सिफारिशें साफ संकेत देती हैं कि इंडस्ट्री टैक्स विवादों के तेज समाधान और कस्टम्स सिस्टम के आधुनिकीकरण को सबसे बड़ी प्राथमिकता मान रही है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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