सांप का जहर सिर्फ जान लेने के लिए नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए भी दुनिया भर में ऊंचे दामों पर बिकता है. कोबरा का जहर वैश्विक चिकित्सा और अनुसंधान बाजार में सबसे कीमती कच्चे माल में से एक है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करोड़ों में है, जिसका उपयोग कैंसर, अल्जाइमर और दिल की बीमारियों की दवाएं बनाने में किया जा रहा है. हालांकि, मुनाफे के इस खेल ने अवैध तस्करी और नशे के काले कारोबार को भी जन्म दिया है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोबरा के जहर की कीमत उसकी शुद्धता और प्रजाति पर निर्भर करती है. अनुमानों के मुताबिक, एक ग्राम उच्च गुणवत्ता वाले कोबरा जहर की कीमत $150 से $250 (लगभग ₹12,000 से ₹20,000) तक हो सकती है. वहीं, अवैध या ब्लैक मार्केट में इसकी ‘प्रॉसेस्ड’ कीमत कई बार ₹30 लाख से ₹50 लाख प्रति ग्राम तक बताई जाती है. अगर इसे लीटर में देखें, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक लीटर शुद्ध जहर की वैल्यू ₹40 करोड़ से ₹80 करोड़ तक पहुंच सकती है.
दवा कंपनियों के लिए क्यों है यह ‘अमृत’?
कोबरा के जहर में विशेष प्रकार के एंजाइम और प्रोटीन होते हैं, जिनका उपयोग जीवन रक्षक दवाएं बनाने में किया जाता है:
- दर्द निवारक (Painkillers): कोबरा के जहर से बनी दवाएं मॉर्फिन से भी कई गुना अधिक प्रभावी होती हैं और उनकी आदत भी नहीं पड़ती.
- कैंसर रिसर्च: इसके जहर में मौजूद ‘कोब्रोटॉक्सिन’ का उपयोग कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने के लिए किया जा रहा है.
- दिल की बीमारियां: ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक के इलाज में इसके जहर के तत्वों का इस्तेमाल होता है.
- गठिया और लेप्रोसी: गठिया के दर्द और कुष्ठ रोग (Leprosy) के उपचार में भी इसके अर्क का उपयोग होता है.
जहर के सबसे बड़े कारखाने
जहर के इस व्यापार में चीन और थाईलैंड जैसे देश सबसे आगे हैं. चीन में ‘स्नेक फार्मिंग’ एक संगठित उद्योग बन चुका है, जहां हजारों सांपों से जहर निकालकर हर साल अरबों रुपये की कमाई की जाती है. भारत में भी तमिलनाडु की ‘इरुला स्नेक कैचर्स को-ऑपरेटिव’ जैसी संस्थाएं कानूनी रूप से जहर निकालने का काम करती हैं, जो देश में एंटी-वेनम बनाने के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराती हैं.
नशे का काला कारोबार और तस्करी
जहर के औषधीय उपयोग के साथ-साथ इसका एक काला पक्ष भी है. हाल के वर्षों में ‘स्नेक वेनम’ का इस्तेमाल पार्टी ड्रग्स के रूप में बढ़ा है. तस्कर कोबरा के जहर को पाउडर या तरल रूप में ऊंचे दामों पर बेचते हैं, जिसका इस्तेमाल रेव पार्टीज में नशे के लिए किया जाता है. भारत के कई महानगरों में करोड़ों रुपये का अवैध जहर जब्त होना इस बात का प्रमाण है कि यह दुनिया का सबसे जोखिम भरा स्मगलिंग बिजनेस बन चुका है.
कठिन है जहर निकालने की प्रक्रिया
कोबरा से जहर निकालना (Milking) न केवल जानलेवा है, बल्कि बहुत धीमा काम भी है. एक बार में एक कोबरा से बहुत कम मात्रा में जहर निकलता है. एक लीटर जहर इकट्ठा करने के लिए सैकड़ों कोबरा का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसके बाद इसे ‘फ्रीज-ड्राय’ (Freeze-dry) कर पाउडर बनाया जाता है ताकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके. यही जटिल प्रक्रिया इसकी कीमत को आसमान पर पहुंचा देती है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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