25 फरवरी 2026 को कर्नाटक के बेंगलुरु सर्राफा बाजार में 22 कैरेट सोने का भाव 14,950 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया. दिल्ली में 14,846 रुपये, तो इंदौर में 14,605 रुपये रहा. यह कीमत हाल के उच्च स्तरों में गिनी जा रही है. ऐसे में बेंगलुरु के 5 ग्राम सोने की कीमत को आधार मानकर गणित समझ लेते हैं.
5 ग्राम सोने की मूल कीमत कितनी?
जब एक ग्राम 14,950 रुपये का है, तो 5 ग्राम सोने का मूल्य 74,750 रुपये होगा. यह सिर्फ कच्चे सोने की कीमत है. यानी अगर आप केवल सोने की धातु खरीदें तो इतनी राशि देनी होगी. लेकिन गहने बनवाने में कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
सोने को डिजाइनर ईयररिंग में ढालने के लिए ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज लेते हैं. इसे वैल्यू एडिशन भी कहा जाता है. यह प्रतिशत डिजाइन और शोरूम के अनुसार बदलता है. साधारण डिजाइन पर 8% तक और भारी कारीगरी पर 15% या उससे अधिक भी लिया जा सकता है.
यदि हम शादी के लिए एक सामान्य लेकिन आकर्षक डिजाइन मानकर 10% मेकिंग चार्ज जोड़ें, तो 74,750 रुपये का 10% यानी 7,475 रुपये अतिरिक्त जुड़ेंगे. अब सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज मिलाकर कुल रकम 82,225 रुपये हो जाती है.
अक्सर ग्राहक सिर्फ गोल्ड रेट देखकर दुकान पर जाते हैं और मेकिंग चार्ज के कारण बिल बढ़ा हुआ देखकर चौंक जाते हैं. इसलिए पहले से 10–12 फीसदी का अनुमान जोड़कर चलना समझदारी है.
GST के बाद अंतिम बिल कितना?
सोने के गहनों पर 3% जीएसटी अनिवार्य है. यह टैक्स केवल सोने की कीमत पर नहीं बल्कि सोना और मेकिंग चार्ज जोड़ने के बाद कुल रकम पर लगाया जाता है.
82,225 रुपये पर 3% जीएसटी करीब 2,467 रुपये बनता है. अब यदि तीनों रकम जोड़ें- 74,750 रुपये (सोना), 7,475 रुपये (मेकिंग चार्ज) और 2,467 रुपये (जीएसटी) तो अंतिम बिल लगभग 84,692 रुपये बैठता है. यानी 5 ग्राम की साधारण 22 कैरेट गोल्ड ईयररिंग बनवाने के लिए आपको करीब 84,700 रुपये का बजट तैयार रखना चाहिए.
स्टोन वर्क हो तो बढ़ेगा खर्च
ऊपर किया गया हिसाब केवल सोने पर किए गए सादे डिजाइन पर लागू होता है. यदि ईयररिंग में लाल, हरे पत्थर या मोती जड़े जाते हैं, तो सोने का शुद्ध वजन कम माना जाता है और स्टोन चार्ज अलग से जोड़ा जाता है. ऐसे मामलों में अंतिम बिल और बढ़ सकता है. इसलिए खरीदारी से पहले स्टोन चार्ज की स्पष्ट जानकारी लेना जरूरी है.
गोल्ड रेट और जीएसटी तय होते हैं, इनमें मोलभाव संभव नहीं है. लेकिन मेकिंग चार्ज पर अक्सर बातचीत की गुंजाइश रहती है. कई बड़े शोरूम त्योहार या शादी के सीजन में मेकिंग चार्ज पर छूट भी देते हैं. समझदारी इसी में है कि हर रुपये का हिसाब रखें, क्योंकि शादी के खर्च पहले से ही कम नहीं होते.
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