FDI New Rule : सरकार ने एफडीआई के नियमों में बदलाव किया है और अब सीमापार चीन जैसे देशों से देश में पैसे आना आसान हो गया है. जाहिर है कि इसका फायदा भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा, लेकिन कुछ सेक्टर को चुनौतियों का भी सामना करन पड़ सकता है. सरकार ने इस नियम को मंजूरी देते समय इस बात का ख्याल रखा है कि देश में निवेश करने वाली चीन की कंपनियां भारतीय कंपनियों पर अधिकार हासिल न कर सकें.
सरकार ने एफडीआई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है.
केंद्रीय कैबिनेट ने एफडीआई नियमों में बदलाव के साथ ही कहा है कि ऐसे किसी भी देश को भारत में निवेश करते समय उसके लाभार्थी का मालिकाना हक और निवेश को अप्रूव करने की टाइमलाइन भी स्पष्ट कर दी है. खासकर जब ऐसा निवेश मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में किया जा रहा हो. कैबिनेट ने यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लिया गया है. एफडीआई नियमों में बदलाव करने का मकसद देश में विनिर्माण को बढ़ावा देना और व्यापार में आसानी लाना है. सरकार ने साफ कहा है कि इस एफडीआई से भारतीय स्टार्टअप और डीप टेक कंपनियों को ग्लोबल फंड पाने में आसानी होगी.
साफ बताना होगा मालिक का नाम
एफडीआई नियमों में बदलाव करने के साथ ही सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब निवेश निवेश भले ही आसानी से आ सकेगा, लेकिन कंपनियों को इससे लाभ प्राप्त करने वाले की डिटेल स्पष्ट बतानी होगी. इसके मानदंड भी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2005 के तहत इस्तेमाल की जाने वाली परिभाशा के अनुरूप होंगे. नए नियमों के तहत साफ कहा गया है कि ऐसे देशों के निवेश जो भारत के साथ सीमाएं साझा करते हैं, अगर यह 10 फीसदी से ज्यादा नहीं है तो ऑटोमैटिक अनुमति मिल जाएगी. बशर्ते की अन्य सभी नियमों का पालन किया जाना चाहिए. ऐसे सभी निवेश की जानकारी डीपीआईआईटी को भी देनी होगी.
60 दिन में देनी होगी मंजूरी
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नए नियम के तहत विनिर्माण क्षेत्र में एफडीआई को तेजी से मंजूरी देने का भी प्रस्ताव दिया गया है. यह समय सीमा अब 60 दिन निर्धारित की गई है, जो तेजी से एफडीआई लाने में मदद करेगी. हालांकि, यह भी साफ कहा गया है कि ऐसे निवेश वाली संस्था में बहुमत हिस्सेदारी और नियंत्रण हमेशा भारतीय नागरिकों या उनके स्वामित्व अथवा नियंत्रण वाली संस्थाओं के पास ही रहना चाहिए.
5 साल पहले लागू हुआ था नया नियम
एफडीआई को लेकर प्रेसनोट 3 अप्रैल, 2020 में महामारी के दौरान लागू किया गया था. इसका मकसद कोविड का फायदा उठाने की मंशा से भारतीय कंपनियों पर दबाव और उनके अधिग्रहण को रोकना था. नए नियम के तहत अब सरकार को उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, कैपिटल गुड्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते सेक्टर को आसानी से निवेश मिलेगा. हालांकि, इससे कुछ सेक्टर्स को प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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