चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.3 से 7.5 प्रतिशत और 2026-27 में सात प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह अनुमान पेशेवर सेवा एवं सलाहकार कंपनी ग्रांट थॉर्नटन ने लगाया है. इससे पहले विश्व बैंक ने भी ऐसा ही अनुमान लगाया था.
ग्रांट थॉर्नटन भारत के साझेदार एवं आर्थिक सलाहकार सेवा प्रमुख (अर्थशास्त्री, मैक्रो इकोनॉमिक अफेयर्स) ऋषि शाह ने बताया कहा कि भारतीय आयात पर अमेरिकी शुल्क और अन्य बाधाओं के बावजूद निर्यात स्थिर बना हुआ है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि चालू वित्तवर्ष में 7.3 से 7.5 फीसदी का आकलन उचित है. 2026-26 में यह 6.7 से 7 फसीदी के करीब होगा. उन्होंने भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए अर्थव्यवस्था के लिए बाहरी कारकों को एक बड़ा दबाव वाला फैक्टर भी बताया.
अमेरिका खड़ी कर सकता है चुनौती
शाह ने कहा कि दक्षिण अमेरिका और पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दे आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं. आगामी केंद्रीय बजट से अपेक्षाओं के बारे में बात करते हुए शाह ने कहा कि यह एक दिशा-निर्देश देने वाला दस्तावेज है और भविष्य के लिए सरकार की सोच को दर्शाता है. लिहाजा इस साल का मुख्य जोर व्यापार करने में आसानी पर होना चाहिए. रुपये में गिरावट के बारे में शाह ने कहा कि उन्हें लगता है कि यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 रुपये के मौजूदा स्तर के आसपास स्थिर हो जाएगा और इसमें आगे ज्यादा गिरावट नहीं दिखेगी.
कमजोर रुपया है न्यू नॉर्मल
डॉलर और रुपये में चल रही उठापटक पर शाह ने कहा कि हमें थोड़ी कमजोर मुद्रा के साथ जीना सीख लेना चाहिए. हम अपनी अधिकतर महत्वपूर्ण वस्तुएं आयात करते हैं और हमारे जैसे देश के लिए मुझे लगता है कि कमजोर मुद्रा का होना वास्तव में फायदेमंद है. शाह ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को रेपो दर में एक बार और कटौती करने की बात भी कही. इस तथ्य को देखते हुए कि महंगाई दर रिजर्व बैंक के 4 से 6 फीसदी के निचले स्तर से नीचे रही है. आने वाले समय में रेपो रेट और नीचे आने की संभावना है.
खाने-पीने की चीजों पर भी महंगाई कम
शाह ने अनुमान लगाया है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद यह करीब 4 फीसदी या उससे भी कम रही है. मुझे लगता है कि शायद 0.25 फीसदी की एक और कटौती की गुंजाइश है, लेकिन इससे अधिक नहीं. केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी में ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू किया. इसके परिणामस्वरूप रेपो दर में कुल 1.25 फीसदी की कटौती की गई और अब यह 5.25 फीसदी पर आ गई है. आरबीआई की ब्याज दर निर्धारण समिति ‘मौद्रिक नीति समिति’ (एमपीसी) की बैठक 4 से 6 फरवरी तक होनी है. इस बार बजट के तत्काल बाद जनता को एक और खुशखबरी मिल सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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