Greater Noida-Faridabad Link Road : ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद तक जाना आसान हो जाएगा. अभी नोएडा और दिल्ली होकर ही आवाजाही हो पाती है. इस रास्ते पर सुबह-शाम जाम की वजह से सफर में 2 घंटे से भी ज्यादा का समय लग जाता है. लेकिन, मंझावली में पुल का निर्माण पूरा होने के बाद इस दूरी को महज 30 मिनट में पूरा किया जा सकेगा.
मंझावला ब्रिज बनाने का प्रस्ताव साल 1989 में दिया गया था.
ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद तक रोजाना हजारों लोग आते-जाते हैं, लेकिन इन हजारों लोगों को रोजाना जाम से भी जूझना पड़ता है. अभी दोनों शहरों के बीच आने-जाने के लिए नोएडा और दिल्ली के रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है. यह रास्ता लंबा तो पड़ता ही है, साथ ही इस पर जाम की वजह से समय भी ज्यादा लग जाता है. इस मुश्किल को हल करने के लिए ही मंझावली में यमुना नदी पर ब्रिज बनाया जा रहा है. इसका निर्माण कार्य लंबे समय से अटका हुआ था, लेकिन अब इसमें तेजी आई है और जल्द ही कंस्ट्रक्शन पूरे होने की पूरी उम्मीद है.
अभी जाने के लिए क्या रास्ते
ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद जाने के लिए अभी कोई सीधा रास्ता नहीं है. जाहिर है कि यात्रियों को दिल्ली, नोएडा, कालिंदी कुंज और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे से घूमकर जाना पड़ता है. इन सभी रास्तों पर पीक ऑवर में जाम की समस्या आम है. नया रास्ता मंझावली ब्रिज के जरिये दोनों शहरों बीच सीधी कनेक्टिविटी बनाएगा. यह रास्ता न सिर्फ छोटा होगा, बल्कि जाम से भी मुक्ति दिलाएगा.
37 साल से अटका प्रोजेक्ट
मंझावला ब्रिज को बनाने का प्रस्ताव साल 1989 में दिया गया था. तब तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट ने इसकी नींव भी रख दी थी. लेकिन, इसके बाद से ही भूमि अधिग्रहण सहित तमाम मुश्किलों की वजह से इसका निर्माण कार्य बार-बार अटकता रहा. साल 2014 में हरियाणा ने अपनी तरफ के पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, जबकि यूपी की तरफ का निर्माण अटका हुआ है. अब यूपी सरकार ने अपनी तरफ के ब्रिज का निर्माण कार्य भी जल्दी पूरा करने के लिए काम शुरू कर दिया है.
तीन शहरों में आवाजाही आसान
मंझावली पुल के बनने के बाद सिर्फ ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि नोएडा और गाजियाबाद में भी आना-जाना आसान हो जाएगा. इतना ही नहीं, ग्रेटर नोएडा से फरीदाबाद के रास्ते गुरुग्राम जाने के लिए भी इस पुल का इस्तेमाल किया जा सकेगा. इस सड़क के निर्माण पर करीब 66 करोड़ रुपये का खर्चा आने का अनुमान है. अभी तक 70 फीसदी जमीन का अधिग्रहण भी पूरा हो चुका है, लेकिन शेष जमीन का अधिग्रहण करना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. फिलहाल किसानों के साथ जमीन की कीमत को लेकर मोलभाव चल रहा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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