सीतारमण ने यह भी साफ किया कि इस पहल को केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि विकसित भारत तक पहुंचने के लिए बड़े स्तर पर फंडिंग, क्रेडिट और बैंकिंग सुविधा की जरूरत होगी और बैंकिंग सेक्टर को इतना सक्षम बनाया जाना चाहिए कि वह आम लोगों तक आसानी से पहुंचे.
हाई लेवल कमेटी का क्या होगा मकसद
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने हाई लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत की घोषणा की थी. इस कमेटी का उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर की व्यापक समीक्षा करना और इसे देश की अगली ग्रोथ फेज के अनुरूप तैयार करना है. इसमें वित्तीय स्थिरता, फाइनेंशियल इंक्लूजन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
पीएफसी और आरईसी के पुनर्गठन की योजना
बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के एनबीएफसी की क्षमता बढ़ाने के लिए पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के पुनर्गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है. ये दोनों कंपनियां पावर सेक्टर में फंडिंग का अहम रोल निभाती हैं, जिसमें बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट शामिल हैं.
पीएफसी ने 2019 में सरकार से आरईसी में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी और इसके लिए करीब 14,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था. उस समय प्रति शेयर अधिग्रहण कीमत 139.50 रुपये तय की गई थी और कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स से इन प्रिंसिपल मंजूरी मिली थी.
पीएफसी और आरईसी के विलय पर क्या स्थिति है
हाल ही में पीएफसी बोर्ड ने आरईसी लिमिटेड के साथ विलय के लिए इन प्रिंसिपल मंजूरी दी है. बजट में इस घोषणा के बाद यह कदम उठाया गया है. पीएफसी और आरईसी दोनों नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं और इनका विलय पावर सेक्टर फाइनेंसिंग में कंसोलिडेशन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
मेगा बैंकों की जरूरत क्यों
वित्त मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बड़े स्तर पर फंडिंग और क्रेडिट सिस्टम जरूरी है. इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री, पावर और आम लोगों तक लोन पहुंचाने के लिए मजबूत बैंकिंग सिस्टम की जरूरत होगी. इसलिए सरकार बैंकिंग सेक्टर को बड़े और अधिक सक्षम संस्थानों में बदलने के लिए रणनीति तैयार कर रही है.
आगे क्या हो सकता है
हाई लेवल कमेटी की रिपोर्ट के बाद बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार, कंसोलिडेशन और स्ट्रक्चरिंग की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं. इससे भारत की ग्रोथ स्टोरी को सपोर्ट करने के लिए बैंकिंग सिस्टम को तैयार करने का रोडमैप सामने आएगा और विकसित भारत के लक्ष्य के लिए फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जा सकेगा.
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