Compensation in Chartered Plane : महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन हादसे का शिकार बन गया और उनके साथ करीब 6 लोगों की मौत हो गई. अब सवाल ये है कि क्या एयर इंडिया हादसे की तरह इस क्रैश में भी पीडि़त परिवारों को मुआवजा मिलेगा.
सबसे पहले यह समझते हैं कि एक चार्टर्ड प्लेन और कॉमर्शियल विमान में मुआवजे को लेकर क्या नियम हैं. एयर इंडिया विमान हादसे में जान गंवाने वालों को Montreal Convention 1999 के नियमों के तहत मुआवजा दिया गया था. इस नियम को दुनियाभर की सभी एयरलाइंस पर लागू किया गया है. भारत में भी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने Carriage by Air Act और अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू किया है, जिसमें Montreal Convention भी शामिल है.
कब लागू होता है Montreal Convention
देश की सभी कॉमर्शियल फ्लाइट चाहे वह घरेलू उड़ान हो या अंतरराष्ट्रीय, सभी पर Montreal Convention लागू होता है. विमान हादसे के दौरान किसी यात्री की मौत हुई है चाहे गंभीर रूप से घायल हुआ हो, उसे या उसके परिवार को इस नियम के तहत 1.5 से 1.85 करोड़ रुपये तक का मुआवजा मिलता है. इस नियम के तहत न तो विमान चालक या उसकी कंपनी की गलती साबित करने की जरूत होती है और न ही लापरवाही. हादसे या फिर किसी भी अनहोनी पर यह नियम स्वत- लागू हो जाता है.
चार्टर्ड विमानों के लिए क्या नियम
जैसा कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम के साथ हुआ तो ऐसे चार्टर्ड विमानों को कॉमर्शियल उड़ान नहीं माना जाता है. लिहाजा इस तरह के हादसे में Montreal Convention का नियम भी लागू नहीं होगा. बावजूद इसके चार्टर्ड विमानों के क्रैश होने पर भी जान गंवाने वालों या गंभीर रूप से घायलों को मुआवजा मिलता है, लेकिन यह ऑटोमैटिक या फिक्स्ड न हीं होता है. ऐसे मामलों में चार्टर्ड ऑपरेटर जैसे अजित पवार के मामले में वीएसआर कंपनी के पास थर्ड पार्टी इंश्योरेंस जरूर होना चाहिए. इसी इंश्योरेंस के तहत चार्टर्ड विमान के हादसे के बाद पीडि़तों को मुआवजा दिया जाता है.
कैसे कर सकते हैं मुआवजे का दावा
चार्टर्ड विमानों के हादसे के बाद मुआवजे का दावा करने के लिए सिविल कोर्ट या उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. इसमें मुआवजे की राशि पीडि़त की उम्र, कमाई, आश्रितों और मौत की वजह के आधार पर तय किया जाता है. Montreal Convention के तहत जहां 1 से 2 करोड़ का फिक्स्ड मुआवजा मिलता है, वहीं चार्टर्ड विमानों के मामले में 7 से 11 करोड़ रुपये तक का मुआवजा दिया गया है. इससे पहले मैंगलुरु और कोझिकोड में हुए चार्टर्ड विमान के हादसे के बाद पीडि़त परिवारों को 11 करोड़ रुपये तक का मुआवजा मिला है. हालांकि, ऐसे हादसों में औसत मुआवजा 50 लाख से 2 करोड़ तक होता है, लेकिन कोई फिक्स्ड अमाउंट नहीं है.
अजित पवार केस में शायद न मिले मुआवजा
जैसा कि आपको बताया कि चार्टर्ड विमानों के हादसे में Montreal Convention का नियम लागू नहीं होता है और इसमें मुआवजा पाने के लिए गलती साबित करना जरूरी होता है. जैसे पायलट की लापरवाही या फिर विमान में आई तकनीकी खराबी. लेकिन, अगर यह हादसा बिना किसी गलती या लापरवाही से हुआ है तो इसके पीछे खराब मौसम वजह है तो फिर मुआवजे से इनकार भी किया जा सकता है. अजित पवार के मामले में हादसे का कारण भी खराब मौसम बताया जा रहा है. लिहाजा इस मामले में मुआवजे के लिए पीडि़तों को जद्दोजहद करनी पड़ सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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