हरियाणा में IDFC First Bank की चंडीगढ़ ब्रांच में करीब 590 करोड़ रुपये के सरकारी फंड में गड़बड़ी का मामला सामने आया है. जांच में खुलासा हुआ कि लगभग 100 करोड़ रुपये चंडीगढ़ के एक बहन-भाई की कंपनी में ट्रांसफर किए गए. पुलिस ने महिला के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है और उसके भाई की तलाश जारी है. बैंक की आंतरिक जांच में सामने आया कि ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेज और पेमेंट इंस्ट्रक्शन के जरिए पैसे गलत खातों में ट्रांसफर किए और इसमें बाहरी लोगों की मिलीभगत भी थी.
ये पूरा मामला हरियाणा सरकार के कई विभागों के पैसे से जुड़ा है. विकास और पंचायत विभाग ने 2025 में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 50 करोड़ और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 25 करोड़ रुपये जमा किए थे. लेकिन जब जांच हुई तो अकाउंट में पैसे कम निकले. बैंक ने खुद जांच की और पाया कि ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने फर्जी डॉक्यूमेंट्स और पेमेंट इंस्ट्रक्शन क्लियर करके पैसे गलत जगह ट्रांसफर कर दिए. बैंक का कहना है कि ये कर्मचारी बाहर के लोगों से मिलकर काम कर रहे थे.
एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मचारी भी शामिल
हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी ने इसकी शिकायत की. 23 फरवरी 2026 को एसीबी के पंचकूला थाने में एफआईआर दर्ज हुई और इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मचारियों, कुछ अज्ञात सरकारी अफसरों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के मामले लगाए गए हैं. प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 13(2) भी लगाई गई है.
बैंक कर्मचारी और चार सीनियर आईएएस अफसर भी जांच के दायरे में
जांच एसीबी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम कर रही है. टीम में डीएसपी लेवल का अधिकारी प्रमुख है और एसपी लेवल का अधिकारी निगरानी कर रहा है. जांच में 391 से ज्यादा संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं, जो 170 से ज्यादा अकाउंट्स से जुड़े हैं. इनमें हरियाणा सरकार के बड़े विभाग, बैंक कर्मचारी और चार सीनियर आईएएस अफसर भी जांच के दायरे में हैं. कई लोगों से पूछताछ हो चुकी है और जल्द गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक पूर्व मैनेजर, जो पंचकूला का रहने वाला है और छह महीने पहले बैंक छोड़ चुका है, उसकी भी बड़ी भूमिका बताई जा रही है. उसके खिलाफ भी लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है. जांच के दौरान ये देखा रहा है कि क्या बैंक वालों ने सरकारी विभाग के ऑथराइजेशन लेटर के आधार पर पैसे ट्रांसफर किए या खुद से ऐसा किया है. साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है कि पैसे सिर्फ स्टॉक मार्केट में लगाए गए या रियल एस्टेट में भी.
बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है. पुलिस कंप्लेंट की है और फॉरेंसिक जांच के लिए केपीएमजी को लगाया है. हरियाणा सरकार ने बैंक को सरकारी काम से हटा दिया है. इससे पहले ये भी खबर सामने आई थी कि सीएम नायब सिंह सैनी ने जानकारी दी थी कि पूरे पैसे की रिकवरी 24 घंटे में कर ली गई है. बैंक की एक शाखा के मिडल और लोवर कर्मचारी इस मामले शामिल थे. सीएम ने बताया कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी बनाई गई है और यह इस मामले कि जांच करेगी और ये भी सुनिश्चित करेगी कि ऐसा दोबारा ना हो.
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