आयकर विभाग को विदेशी टैक्स एजेंसियों से जो डेटा मिला है, उसके आधार पर कई हाई रिस्क टैक्सपेयर्स की पहचान की गई है. इन्होंने विदेशों में बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी या निवेश हैं लेकिन उन्होंने इन्हें भारत में टैक्स रिटर्न में नहीं बताया. अब इन मामलों में नोटिस भेजने की तैयारी है और भारी टैक्स के साथ कड़ी पेनल्टी भी लग सकती है. यह पूरी कार्रवाई Automatic Exchange of Information यानी AEOI फ्रेमवर्क के तहत हो रही है, जिसे OECD देशों ने टैक्स चोरी रोकने के लिए बनाया है. इसके तहत विदेशी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस भारतीय टैक्स एजेंसियों को भारतीय नागरिकों के विदेशी अकाउंट और एसेट्स की जानकारी हर साल भेजते हैं. इसी डेटा के जरिए आयकर विभाग अब टैक्स चोरी करने वालों को ट्रैक कर रहा है.
AEOI और CRS से कैसे पकड़ में आते हैं विदेशी अकाउंट
AEOI के तहत Common Reporting Standard यानी CRS सिस्टम काम करता है. इसमें विदेशों के बैंक और फाइनेंशियल संस्थान दूसरे देशों के रेजिडेंट्स की जानकारी अपने टैक्स अधिकारियों को देते हैं, जो बाद में उस व्यक्ति के होम कंट्री को भेजी जाती है. इसी डेटा के आधार पर भारत के आयकर विभाग को पता चलता है कि किस भारतीय नागरिक के विदेश में अकाउंट या संपत्ति है.
2024 में आयकर विभाग ने NUDGE कैंपेन शुरू किया था, जिसमें ऐसे टैक्सपेयर्स को चेतावनी दी गई थी जिनके विदेशी एसेट्स रिटर्न में नहीं दिखे थे. इस कैंपेन का असर यह हुआ कि करीब 24,678 टैक्सपेयर्स ने अपने रिटर्न दोबारा फाइल किए और करीब 29,208 करोड़ रुपये की विदेशी संपत्ति और 1,090 करोड़ रुपये की विदेशी इनकम का खुलासा किया. अब यही अभियान बिजनेस फैमिलीज तक बढ़ाया जा रहा है.
विदेशी संपत्ति छुपाने पर कितना टैक्स और पेनल्टी लगेगी
अगर कोई विदेशी संपत्ति या इनकम छुपी हुई पाई जाती है, तो उस पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा. इसके अलावा टैक्स की तीन गुना तक पेनल्टी भी लग सकती है. यानी कुल मिलाकर भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है. ब्लैक मनी एक्ट के तहत गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई और प्रॉसिक्यूशन भी संभव है, जिससे बिजनेस फैमिलीज में चिंता बढ़ गई है.
छोटे टैक्सपेयर्स के लिए सरकार की खास वन टाइम स्कीम
यूनियन बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक खास छह महीने की वन टाइम स्कीम का ऐलान किया है. इसमें स्टूडेंट्स, यंग प्रोफेशनल्स, टेक एम्प्लॉयी और रिलोकेटेड एनआरआई शामिल हैं. अगर उनकी विदेशी संपत्ति या इनकम एक तय लिमिट से कम है, तो वे टैक्स देकर खुलासा कर सकते हैं और उन्हें कोई पेनल्टी नहीं लगेगी. अगर अघोषित संपत्ति या इनकम की सीमा 1 करोड़ रुपये तक है, तो व्यक्ति को 30 प्रतिशत टैक्स और 30 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देना होगा, जिसके बदले उन्हें प्रॉसिक्यूशन से इम्युनिटी मिलेगी.
बिजनेस फैमिलीज पर क्यों बढ़ रही है कार्रवाई
टैक्स अधिकारियों के मुताबिक, कई भारतीय बिजनेस फैमिलीज की विदेशों में पुरानी संपत्तियां, विरासत में मिली संपत्ति, फैमिली अरेंजमेंट या विदेशी जॉब से जुड़े अकाउंट हैं, जिनका खुलासा नहीं किया गया है. अब CRS डेटा के जरिए ऐसे मामलों की पहचान हो रही है और नोटिस की संख्या लगातार बढ़ रही है. कुल मिलाकर सरकार का साफ मैसेज है कि विदेशों में पैसा और संपत्ति छुपाने का दौर खत्म हो रहा है. या तो खुद खुलासा करो और टैक्स दो, नहीं तो भारी टैक्स, पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहो.
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