Income Tax Dispute : इनकम टैक्स के विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं. पिछले 3 साल में ऐसे विवादों की संख्या में 8 गुना की बढ़ोतरी हुई है और कुल बकाया बढ़कर 35 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.
मनीकंट्रोल ने एक एनालिसिस रिपोर्ट में बताया कि पिछले तीन वित्तवर्ष में टैक्स डिफॉल्ट के आंकड़े 470 फीसदी बढ़ गए हैं, जो नॉन कॉरपोरेट कैटेगरी के हैं और व्यक्तिगत, एचयूएफ और ट्रस्ट से जुड़े विवाद हैं. आंकड़े दिखाते हैं कि वित्तवर्ष 2025 तक भारत करीब 20 लाख करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड अटकी पड़ी है और अभी तक इसका भुगतान नहीं किया गया. महज तीन साल पहले तक यानी वित्तवर्ष 2022 तक यह आंकड़ा सिर्फ 25,396 करोड़ रुपये था, जिसमें अब 783 फीसदी की बढ़ोतरी आ चुकी है.
टैक्स वसूली का भी रास्ता नहीं
आंकड़े बताते हैं कि टैक्स डिमांड के यह मामले ऐसे करदाताओं से जुड़े हैं, जिनसे टैक्स वसूली का कोई रास्ता ही नहीं है. विभाग इन करदाताओं की कोई संपत्ति भी जब्त नहीं कर सकता है, क्योंकि उन्होंने किसी एसेट का जिक्र ही नहीं किया है. कई टैक्सपेयर या तो भाग चुके हैं या फिर उनका कोई अता-पता ही नहीं है. जाहिर है कि इनकम टैक्स विभाग के पास इन पैसों की वसूली का कोई रास्ता नहीं बचा है. ज्यादातर केस कानूनी अड़चनों में उलझे हुए हैं.
कंपनियों पर भी लाखों करोड़ बकाया
ऐसा नहीं है कि टैक्स का बकाया सिर्फ आम आदमी और ट्रस्ट पर ही है, कंपनियों पर भी मोटा पैसा बकाया चल रहा है. कॉरपोरेट टैक्स कैटेगरी में भी टैक्स डिमांड महज तीन साल में 263 फीसदी बढ़कर 7.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. आंकड़ों के अनुसार, 10 साल से ज्यादा पुराने मामलों में व्यक्ति टैक्स वसूली 1.5 लाख करोड़ रुपये बकाया है. इसमें 10 साल के दौरान 15,144 फीसदी का उछाल दिखा. अगर कुल टैक्स डिमांड की बात करें तो 10 साल के भीतर इसमें 3,048 फीसदी का उछाल आया है. इतना ही नहीं, 5 साल से ज्यादा और 10 साल से कम की टैक्स डिमांड में भी 4 हजार फीसदी का उछाल दिख रहा है.
आईबीसी नियमों में उलझाया मामला
कॉरपोरेट टैक्स का बकाया बढ़ने के पीछे इन्सॉलवेंसी एंड बैंकरप्टी कोड यानी आईबीसी कानून को भी एक वजह माना जा रहा है. इस कानून के तहत मामला सुलझने के बावजूद टैक्स चुकाना प्राथमिकताओं में नहीं होता. फिलहाल आयकर विभाग ने अमीरों के विदेशी एसेट का खुलासा नहीं करने पर आंखें जमा दी हैं और उनकी कोशिश है कि ऐसे अमीरों से जितना हो सके टैक्स वसूला जा सके. बजट 2026 में खुलासा हुआ है कि वित्तवर्ष 2025 में भले ही टैक्स विवाद के मामलों में 52 फीसदी का उछाल आया हो, लेकिन इसका अमाउंट बढ़कर 15.7 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. इस तरह, कुल 35 लाख करोड़ की टैक्स डिमांड अटकी हुई है.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.