चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों के दौरान कुल रिसीप्ट्स 25.25 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो पूरे वर्ष के लक्ष्य का 72.2 फीसदी है, जबकि अप्रैल से दिसंबर तक कुल खर्च 33.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जो इस वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का 66.7 फीसदी है. पिछले वर्ष की इसी अवधि में कुल रिसीप्ट्स अनुमानित लक्ष्य का 72.3 फीसदी थीं, जबकि खर्च 67 फीसदी था.
चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान नेट टैक्स रिसीप्ट्स 19.4 लाख करोड़ रुपये रहीं, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में एकत्रित 18.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हैं. नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़कर 5.4 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि में 4.5 लाख करोड़ रुपये था.
खर्च में आई कमी
कुल सरकारी खर्च पिछले वर्ष की इसी अवधि के 32.3 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 33.8 लाख करोड़ रुपये हो गया. सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करने के कारण राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.9 लाख करोड़ रुपये हो गया.
फिस्कल डेफिसिट का टारगेट जीडीपी का 4.4 फीसदी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में फिस्कल डेफिसिट का टारगेट जीडीपी का 4.4 फीसदी तय किया है, जो 15.7 लाख करोड़ रुपये बनता है. यह देश की फिस्कल स्थिति को मजबूत करने के लिए घाटे में घटते क्रम को अपनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. संशोधित अनुमान के अनुसार, 2024-25 के लिए भारत का फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 4.8 फीसदी था.
क्या होता है फिस्कल डेफिसिट
फिस्कल डेफिसिट का मतलब होता है सरकार की कमाई और खर्च के बीच का घाटा यानी सरकार जितना पैसा कमाती है, उससे ज्यादा खर्च करती है तो उस फर्क को ही फिस्कल डेफिसिट कहते हैं. मान लीजिए सरकार की सालाना कमाई (टैक्स, फीस आदि) 100 रुपये और सरकार का खर्च (सैलरी, सड़क, रेलवे, स्कीम आदि) 120 रुपये है तो जो 20 रुपये का अंतर है, वही फिस्कल डेफिसिट कहलाता है.
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