आयात में हुई यह वृद्धि अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत द्वारा उठाया गया एक सुनियोजित कदम है. नवंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि मात्रा (Quantity) के मामले में अमेरिका से आने वाली कीमती धातुओं ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. सोना-चांदी के अलावा भारत ने अमेरिका से कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात भी बढाया है.
कीमती धातुओं और तेल के अलावा, भारत अब अमेरिका से कंप्यूटर हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, फल और मेडिकल उपकरणों का भी बड़े पैमाने पर आयात कर रहा है. अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान अमेरिका से कुल आयात 35.40 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जो पिछले साल की तुलना में 13.49% अधिक है. भारत द्वारा अमेरिका से आयात बढ़ाना एक ‘डैमेज कंट्रोल’ रणनीति की तरह है. इससे एक तरफ देश की मांग पूरी हो रही है तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ व्यापारिक संतुलन बनने से टैरिफ को हटाने के लिए बातचीत का रास्ता साफ होने की भी संभावना बन रही है. इससे स्पष्ट है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ‘रक्षात्मक’ होने के बजाय ‘रणनीतिक’ तरीके से अपने हितों की रक्षा कर रहा है.
सोने-चांदी का बढा आयात
हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, आयात में हुई यह वृद्धि अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत द्वारा उठाया गया एक सुनियोजित कदम है. नवंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि मात्रा (Quantity) के मामले में अमेरिका से आने वाली कीमती धातुओं ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. केवल एक साल के भीतर अमेरिका से सोने का आयात 95% बढ़कर 4,505 किलोग्राम हो गया है. चांदी का आयात 6,983% की अविश्वसनीय छलांग के साथ 1,28,342 किलोग्राम तक पहुंच गया. विशेषज्ञों का मानना है कि इन उच्च-मूल्य वाली वस्तुओं का आयात बढ़ाकर भारत बहुत ही कम समय में अमेरिका के साथ अपने व्यापार घाटे (Trade Deficit) को संतुलित कर सकता है.
टैरिफ का बढ़ता दबाव
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव पिछले कुछ समय से चरम पर है. अमेरिका ने भारत के साथ अपने व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) पर आपत्ति जताई थी. दरअसल, साल 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.51 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया था, जबकि वहां से आयात केवल 45.62 बिलियन डॉलर का हुआ. इस तरह ट्रेड सरप्लस 40.89 बिलियन डॉलर रहा. अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर पहले 25% टैरिफ लगाया और फिर रूसी कच्चे तेल की खरीद पर 25% अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ लगा दिया. कुल मिलाकर भारतीय सामानों पर 50% का अतिरिक्त शुल्क लग रहा है.
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