भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत ने अपने 8 करोड़ डेयरी किसानों और अन्नदाताओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, दूध, घी और पनीर जैसे पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का और सोयाबीन के आयात पर सख्त पाबंदी बनाए रखने का फैसला किया गया है. धार्मिक भावनाओं और शुद्धता के मानकों के कारण मांसाहारी फीड से जुड़े डेयरी उत्पादों पर भी कोई समझौता नहीं किया गया है.
1. ताजा तरल दूध (Fresh Liquid Milk): ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले तरल दूध के बाजार को भारत ने पूरी तरह सुरक्षित रखा है. विदेशी दूध को अनुमति देने से स्थानीय कलेक्शन नेटवर्क और छोटे डेयरी किसानों को भारी नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए इस पर कोई रियायत नहीं दी गई है.

2. जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का (GM Corn/Maize): भारत जीएम कॉर्न के आयात के सख्त खिलाफ है क्योंकि इससे स्थानीय जैव-विविधता और देसी बीज प्रणालियों को खतरा हो सकता है. मानवीय उपभोग या खुले बाजार के लिए किसी भी जीएम मक्के को व्यापारिक छूट नहीं देने की बात कही जा रही है.

3. देसी घी (Pure Desi Ghee): भारतीय रसोई की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले घी पर कोई समझौता नहीं किया गया है. अमेरिकी बटर ऑयल को भारतीय घी के बाजार में घुसने की अनुमति नहीं मिली है क्योंकि इससे स्थानीय कीमतों में गिरावट आने का डर है.
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4. मांसाहारी पशु आहार (Animal-Derived Feed): भारत ने ऐसे किसी भी पशु आहार के आयात पर प्रतिबंध जारी रखा है जिसमें जानवरों के अंगों का अंश (जैसे ब्लड मील) शामिल हो. यह प्रतिबंध न केवल धार्मिक कारणों से है बल्कि सुरक्षित डेयरी उत्पादों को सुनिश्चित करने के लिए भी अनिवार्य है.

5. पनीर और खोया (Paneer and Khoa): त्योहारों और शादियों के सीजन में इस्तेमाल होने वाले इन पारंपरिक उत्पादों को आयात की सूची से बाहर रखा गया है. सरकार चाहती है कि स्थानीय हलवाइयों और छोटे डेयरी फार्मों का व्यापार सुरक्षित रहे और उन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े.

6. जीएम सोयाबीन और सोया मील (GM Soy and Soy Meal): पशु आहार के रूप में इस्तेमाल होने वाले जीएम सोया मील को लेकर भारत का रुख बहुत कड़ा है. सरकार घरेलू सोयाबीन किसानों के हितों और पशुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केवल गैर-जीएम सोया उत्पादों को ही प्राथमिकता दे रही है.

7. स्किम्ड मिल्क पाउडर (Skimmed Milk Powder – SMP): सरकार दूध की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए SMP का उपयोग करती है. इसे व्यापारिक छूट से बाहर रखकर घरेलू कीमतों पर सरकारी नियंत्रण को और अधिक मजबूत बनाए रखा गया है.

8. होल मिल्क पाउडर (Whole Milk Powder): स्थानीय उत्पादकों को अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते आयात से बचाने के लिए इसे संवेदनशील सूची में रखा गया है. सस्ते विदेशी पाउडर को अनुमति मिलने से भारतीय किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य मिलना असंभव हो जाता.

9. कस्टमाइज्ड डेयरी व्हाइटनर (Dairy Whitener): चाय और कॉफी के विशाल बाजार को ध्यान में रखते हुए डेयरी व्हाइटनर को विदेशी कंपनियों के लिए नहीं खोला गया है. यह उत्पाद भारतीय मध्यम वर्ग में बहुत लोकप्रिय है और इसकी सुरक्षा स्थानीय डेयरी प्रोसेसिंग इकाइयों के लिए अनिवार्य है.

10. बेबी फूड और मिल्क फॉर्मूला (Infant Formula): बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य मानकों की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे आयात रियायतों के दायरे से बाहर रखा गया है. भारत अपने सख्त गुणवत्ता मानकों और एफएसएसएआई के नियमों के साथ कोई समझौता करने को तैयार नहीं है.
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