सरकारी सूत्रों के मुताबिक मौजूदा हालात में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत इजाफा होने की संभावना नहीं है. सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति के वैकल्पिक रास्ते भी उपलब्ध हैं, जिससे फिलहाल घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है.
भारत के पास कितना तेल स्टॉक है
सूत्रों के अनुसार, भारत के पास फिलहाल लगभग 25 दिनों की जरूरत के बराबर कच्चा तेल मौजूद है. इसके अलावा करीब 25 दिनों की मांग पूरी करने के लिए तैयार पेट्रोलियम उत्पाद जैसे पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन का भी भंडार मौजूद है. इस तरह कुल मिलाकर देश के पास करीब 50 दिनों की ऊर्जा जरूरतों को संभालने की क्षमता मानी जा रही है, जो किसी भी आपूर्ति बाधा के समय एक अहम सुरक्षा कवच का काम करती है.
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर भी निर्भरता
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) के रास्ते आता है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत में आने वाले कुल ईंधन सप्लाई का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. हालांकि बाकी लगभग 60 प्रतिशत तेल अलग अलग समुद्री रास्तों से भी भारत तक पहुंचता है, जिससे जोखिम कुछ हद तक कम हो जाता है.
जी7 संकेत से बाजार को राहत
तेल बाजार में हाल ही में आई तेजी के पीछे युद्ध का जोखिम प्रमुख कारण रहा है. हालांकि बाजार को कुछ राहत तब मिली जब जी7 देशों की ओर से संकेत मिला कि जरूरत पड़ने पर वे अपने रणनीतिक तेल भंडार को बाजार में जारी कर सकते हैं. इस संकेत के बाद कच्चे तेल की कीमतें, जो सुबह तेजी से बढ़ रही थीं, शाम तक कुछ नरम पड़ गईं.
क्रूड की कीमत 100 डॉलर के आसपास रहने का अनुमान
ऊर्जा बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रह सकती हैं. अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है या हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो कीमतों में और तेजी भी देखी जा सकती है.
एविएशन सेक्टर को फिलहाल चिंता नहीं
सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल विमानन उद्योग को भी घबराने की जरूरत नहीं है. भारत के पास एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की पर्याप्त उपलब्धता है. खास बात यह है कि भारत केवल एटीएफ का उपभोक्ता ही नहीं बल्कि इसका उत्पादक और निर्यातक भी है. इसलिए घरेलू विमानन कंपनियों की ईंधन जरूरतों को फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा.
दुनिया की नजर अब तेल बाजार पर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर अब तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर टिकी हुई है. यह क्षेत्र वैश्विक तेल व्यापार का एक अहम केंद्र है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी घटना का असर सीधे ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि उसके पास पर्याप्त स्टॉक, विविध आयात स्रोत और मजबूत रिफाइनिंग क्षमता मौजूद है, जिससे तत्काल आपूर्ति संकट की आशंका कम दिखाई दे रही है.
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