बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे दो बड़े कारण हैं. पहला, फेस्टिव सीजन के दौरान उम्मीद से कम मांग के चलते रिटेलर्स के पास भारी मात्रा में अनबिका स्टॉक (Inventory) जमा हो गया. दूसरा, कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत के कारण स्मार्टफोन की औसत कीमतों (ASP) में इजाफा हुआ है, जिससे बजट और मिड-रेंज सेगमेंट के ग्राहकों ने खरीदारी से दूरी बना ली है.
इन्वेंट्री का दबाव और बढ़ती कीमतें
चौथी तिमाही के दौरान स्मार्टफोन निर्माताओं (OEMs) को भारी इन्वेंट्री का सामना करना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाली की सेल के बाद भी चैनल्स में काफी स्टॉक बचा रह गया, जिसके कारण कंपनियों ने नई शिपमेंट में कटौती की. इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और कलपुर्जों की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों को अपने हैंडसेट्स महंगे करने पर मजबूर कर दिया, जिसका सीधा असर बिक्री पर पड़ा.
प्रीमियम सेगमेंट में बरकरार है चमक
भले ही ओवरऑल मार्केट में गिरावट देखी गई हो, लेकिन प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट (30,000 रुपये से ऊपर) में अभी भी बढ़त जारी है. भारतीय ग्राहक अब धीरे-धीरे बेहतर फीचर्स और लंबी लाइफ वाले फोन की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. Apple और Samsung जैसे बड़े ब्रांड्स ने अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो के दम पर इस सुस्ती के बीच भी अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश की है.
5G स्मार्टफोन्स का दबदबा
शिपमेंट में कमी के बावजूद, बाजार में बिकने वाले कुल स्मार्टफोन्स में 5G हैंडसेट्स की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. अब ग्राहक 4G के बजाय भविष्य की तकनीक यानी 5G को प्राथमिकता दे रहे हैं. कंपनियों का ध्यान भी अब किफायती 5G फोन लाने पर है ताकि वे एंट्री-लेवल मार्केट में आई सुस्ती को कम कर सकें और ग्राहकों को अपग्रेड के लिए प्रोत्साहित कर सकें.
2026 के लिए क्या है आउटलुक?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) तक बाजार में यह दबाव बना रह सकता है. कंपनियों को अपनी इन्वेंट्री क्लियर करने में समय लगेगा, जिसके बाद ही नई लॉन्चिंग्स और आक्रामक शिपमेंट देखने को मिलेगी. हालांकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स वाले स्मार्टफोन्स की बढ़ती डिमांड आने वाले समय में बाजार के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है.
शिपमेंट का मतलब
शिपमेंट (Shipments) का मतलब निर्यात (Export) नहीं होता. अक्सर लोग इसमें कंफ्यूज हो जाते हैं, लेकिन डेटा की भाषा में इनका मतलब अलग है. इसका मतलब है कि कंपनियों (जैसे Samsung, Xiaomi) ने अपने कारखानों से निकालकर दुकानदारों या रिटेलर्स को बेचने के लिए कितना स्टॉक भेजा है. यह देश के अंदर की सप्लाई को दर्शाता है. इसे ‘बिक्री’ के करीब माना जाता है क्योंकि दुकानदार तभी माल मंगाता है जब मांग होती है.
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