दिसंबर 2025 में निर्यात वृद्धि मुख्य क्षेत्रों में फैली रही, जिसमें हस्तशिल्प (7.2 प्रतिशत), रेडीमेड गारमेंट्स (2.89 प्रतिशत), और एमएमएफ यार्न, फैब्रिक्स और मेड-अप्स (3.99 प्रतिशत) शामिल हैं. ये रुझान भारत की मूल्य-वर्धित निर्माण, पारंपरिक शिल्प, और रोजगार-प्रधान उत्पादन में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को दिखाते हैं, मंत्रालय ने कहा.
जियो-पॉलिटिकल टेंशन और महंगाई का दबाव
कैलेंडर वर्ष (जनवरी-दिसंबर 2025) में कपड़ा और परिधान निर्यात 37.54 अरब डॉलर पर स्थिर रहा, जिसमें हस्तशिल्प (17.5 प्रतिशत), रेडीमेड गारमेंट्स (3.5 प्रतिशत), और जूट उत्पादों (3.5 प्रतिशत) में वृद्धि रही. इतनी बड़ी स्थिरता, जबकि प्रमुख बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का दबाव रहा, क्षेत्र की स्ट्रचरल मजबूती और विविध निर्यात बास्केट को दर्शाती है, कपड़ा मंत्रालय ने कहा. 2025 की एक खास बात रही है बाजार का बड़ा विविधीकरण. जनवरी-नवंबर 2025 के दौरान भारत के कपड़ा क्षेत्र ने 118 देशों और निर्यात स्थलों में निर्यात वृद्धि दर्ज की, जो 2024 की इसी अवधि की तुलना में बाजार प्रदर्शन में व्यापक सुधार को दिखाता है.
अलग-अलग देशों में कारोबार
मजबूत बढ़त उभरते और पारंपरिक दोनों बाजारों में देखी गई, जैसे संयुक्त अरब अमीरात (9.5 प्रतिशत), मिस्र (29.1 प्रतिशत), पोलैंड (19.3 प्रतिशत), सूडान (182.9 प्रतिशत), जापान (14.6 प्रतिशत), नाइजीरिया (20.5 प्रतिशत), अर्जेंटीना (77.8 प्रतिशत), कैमरून (152.9 प्रतिशत), और युगांडा (75.7 प्रतिशत), साथ ही स्पेन (7.9 प्रतिशत), फ्रांस, इटली, नीदरलैंड्स, जर्मनी, और यूनाइटेड किंगडम जैसे प्रमुख यूरोपीय बाजारों में भी स्थिर बढ़त रही. यह विविध वृद्धि पैटर्न भारत के कपड़ा निर्यात क्षेत्र की मजबूती और भारत की वैश्विक बाजार उपस्थिति के विस्तार को दर्शाता है, मंत्रालय ने कहा.
कुल मिलाकर, निर्यात की लगातार बढ़त, बाजार का विस्तार, और मूल्य-वर्धित क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन भारत की स्थिति को एक भरोसेमंद और मजबूत वैश्विक सोर्सिंग हब के रूप में फिर से साबित करता है. विविधीकरण, प्रतिस्पर्धा, और एमएसएमई भागीदारी पर लगातार जोर के साथ, यह क्षेत्र आगे निर्यात बढ़ाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी भागीदारी को और गहरा करने के लिए तैयार है.
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