किन उत्पादों पर मिल सकती है टैरिफ राहत
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में कहा गया है कि भारत कई अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के साथ-साथ खाद्य और कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करेगा. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, रेड ज्वार, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, कुछ दालें, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं. हालांकि, भारत सरकार के शुरुआती बयान में दालों का उल्लेख नहीं होने से नीति को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है.
भारत का दाल आयात बिल बढ़ा
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का दाल आयात बिल 46 प्रतिशत बढ़कर 5.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इससे पहले 2023-24 में यह आंकड़ा 3.75 अरब डॉलर था. हालांकि, कुल दाल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी सीमित रही और बीते वित्त वर्ष में यह 89.65 मिलियन डॉलर रही. इसके बावजूद, दालों को लेकर किसी भी तरह की टैरिफ छूट घरेलू बाजार के लिए संवेदनशील मुद्दा मानी जाती है.
किसानों के हितों पर सरकार का आश्वासन
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही साफ कर चुके हैं कि इस समझौते में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. उनके मुताबिक, भारत के कृषि उत्पाद अमेरिका में शून्य शुल्क पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिकी किसानों के उत्पादों को भारत में विशेष टैरिफ छूट नहीं दी गई है. उन्होंने यह भी कहा कि चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज और दालें जैसी संवेदनशील फसलें पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी.
विशेषज्ञों की क्या है राय
ग्रांट थॉर्नटन भारत के मनोज मिश्रा के अनुसार, यह समझौता संतुलित कृषि व्यापार की दिशा में कदम है. उन्होंने कहा कि बड़े खाद्यान्न, डेयरी और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों को भारतीय बाजार से बाहर रखा गया है. वहीं, अमेरिका से ट्री नट्स, कॉटन और सोयाबीन ऑयल का निर्यात भारत में बढ़ सकता है. कुल मिलाकर यह डील भारतीय किसानों पर दबाव डाले बिना दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को स्थिर रखने में मदद कर सकती है.
भारत-अमेरिका आर्थिक सहयोग की नई दिशा
सरकार का कहना है कि यह अंतरिम व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करेगा. इसका मकसद सप्लाई चेन को मजबूत करना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा करना है. हालांकि, दालों को लेकर उठे सवालों पर आगे की तस्वीर आधिकारिक दिशानिर्देश सामने आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी. फिलहाल सरकार किसानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताकर भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है.
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