सुयंक्त बयान में कहा गया है कि यह फ्रेमवर्क भारत अमेरिका व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर चल रही वार्ताओं के प्रति दोनों साझेदारों की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि करता है. इन वार्ताओं की शुरुआत फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई थी. यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कुछ ही दिन पहले भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी. यह प्रगति दोनों देशों के बीच लगभग एक साल से जारी व्यापारिक तनाव के बाद आई है.
भारत कृषि क्षेत्र में देगा सीमित छूट
इस फ्रेमवर्क क अनुसार, भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रेणी पर शुल्क समाप्त या कम करेगा. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं.
इन भारतीय उत्पादों पर लगेगा 18 फीसदी टैरिफ
अमेरिका 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश के तहत भारत से आने वाली वस्तुओं पर 18 फीसदी टैरिफ लगाएगा. इसमें वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, घरेलू सजावटी वस्तुएं, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं. अंतरिम समझौते के सफल समापन पर अमेरिका 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 के तहत संभावित शुल्क समायोजन सूची में शामिल कई वस्तुओं पर यह पारस्परिक शुल्क हटाएगा. इनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा विमान के पुर्जे शामिल हैं.
अमेरिका भारत के कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर लगाए गए वे शुल्क भी हटाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों के आधार पर 8 मार्च 2018 तथा 30 जुलाई 2025 की उद्घोषणा के तहत लगाए गए थे. इसी तरह, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप, भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों के लिए एक रियायती शुल्क दर कोटा मिलेगा. दवाओं और औषधीय अवयवों पर अमेरिकी सेक्शन 232 जांच के निष्कर्षों के आधार पर, भारत की जेनेरिक दवाओं और उनके अवयवों पर भी टैरिफ छूट मिलने की बात कही गई है.
दोनों देश रियायती बाजार पहुंच देने पर सहमत
अमेरिका और भारत अपने-अपने हितों वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर रियायती बाजार पहुंच देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों देश मूल-स्थान (Rules of Origin) के नियम स्थापित करेंगे ताकि समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को मिले.
गैर-शुल्क बाधाएं करेंगे दूर
भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को समझेंगे और दूर करेंगे. भारत अमेरिकी मेडिकल उपकरणों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करने पर सहमत है. वहीं, अमेरिकी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच में देरी करने वाली या मात्रात्मक प्रतिबंध लगाने वाली आयात लाइसेंस प्रक्रियाओं को समाप्त करेगा. समझौते के लागू होने के छह महीने के भीतर यह तय करेगा कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानक, जिनमें परीक्षण आवश्यकताएं शामिल हैं, भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाले अमेरिकी निर्यात के लिए स्वीकार्य हैं या नहीं. भारत अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर गैर-शुल्क बाधाओं को भी दूर करेगा.
टैरिफ पर एक ने बदला रुख तो दूसरा भी ऐसा करने को स्वतंत्र
संयुक्त बयान में कहा गया है कि यदि किसी भी देश द्वारा सहमत शुल्कों में बदलाव किया जाता है, तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकेगा. तकनीकी नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के लिए, दोनों देश आपसी सहमति वाले क्षेत्रों में अपने-अपने मानकों और अनुरूपता आकलन प्रक्रियाओं पर चर्चा करेंगे.
ट्रेड डील बातचीत के बीच भी टैरिफ हो सकता है कम
दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के माध्यम से बाजार पहुंच के अवसरों को और बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे. अमेरिका ने पुष्टि की है कि वह BTA वार्ता के दौरान भारतीय वस्तुओं पर शुल्क कम करने के भारत के अनुरोध पर विचार करेगा.
तीसरे पक्ष की नीतियों से मिलकर निपटेंगे
फ्रेमवर्क के अनुसार, दोनों देश आर्थिक सुरक्षा समन्वय को मजबूत करेंगे ताकि आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा सके. साथ ही तीसरे पक्ष की गैर-बाजार नीतियों से निपटने के लिए पूरक कदम उठाए जाएंगे. निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण पर भी सहयोग होगा.
भारत करेगा 500 अरब डॉलर की खरीद
भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों, विमान और उनके पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोल की 500 अरब डॉलर की खरीद का इरादा रखता है. दोनों देश तकनीकी उत्पादों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे, जिनमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) और डेटा सेंटर में उपयोग होने वाले अन्य उपकरण शामिल हैं, तथा संयुक्त प्रौद्योगिकी सहयोग को विस्तार देंगे.
इसके अलावा दोनों देश डिजिटल बिजनेस में उन प्रथाओं को दूर कर करेंगे जो भेदभावपूर्ण या बोझिल है. इसके साथ ही दोनों देशों ने मजबूत, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियम स्थापित करने की प्रतिबद्धता भी जताई है.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.