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भारतीय एविएशन सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और अब यह बदलाव साफ दिखाई देने लगा है. देश की बड़ी एयरलाइन IndiGo में अब 1000 से ज्यादा महिला पायलट काम कर रही हैं. यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी बल्कि पूरे भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है. भारत पहले से ही दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां महिला पायलटों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत ज्यादा है. ऐसे में इंडिगो की यह उपलब्धि एविएशन सेक्टर में महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और अवसरों को दर्शाती है.
भारत के एविएशन सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है. इसी कड़ी में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में से एक IndiGo ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी के बेड़े में अब 1000 से ज्यादा महिला पायलट काम कर रही हैं. यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इंडिगो में महिला 17.5 प्रतिशत पायलट महिला हैं, जो वैश्विक औसत से तीन गुना से अधिक है.

2015 के बाद से IndiGo ने पायलट भर्ती और ट्रेनिंग में महिलाओं को अधिक अवसर देना शुरू किया. कंपनी ने कई ट्रेनिंग प्रोग्राम और स्कॉलरशिप योजनाएं शुरू कीं, जिससे महिला उम्मीदवारों को पायलट बनने का मौका मिला. इसी रणनीति की वजह से आज इंडिगो दुनिया की उन एयरलाइंस में शामिल हो गई है, जहां महिला पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

भारत में इस समय लगभग 15 हजार से ज्यादा कमर्शियल पायलट हैं. इनमें करीब 12–15 प्रतिशत महिलाएं हैं. यह अनुपात कई विकसित देशों से भी बेहतर माना जाता है. Air India और IndiGo जैसी एयरलाइंस ने महिला पायलटों को अवसर देकर इस आंकड़े को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
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वैश्विक स्तर पर अभी भी एविएशन सेक्टर में जेंडर गैप काफी बड़ा है. दुनिया भर में पायलटों में महिलाओं की हिस्सेदारी औसतन करीब 5 से 6 प्रतिशत ही है. ऐसे में भारत उन देशों में शामिल हो गया है जहां महिला पायलटों की भागीदारी अपेक्षाकृत ज्यादा है. IndiGo और Air India जैसे भारतीय एयरलाइंस इस बदलाव को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

पायलट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स होना जरूरी है. इसके बाद उम्मीदवार को DGCA से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूल से ट्रेनिंग लेनी होती है. कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल करने के लिए लगभग 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करनी पड़ती है. इसके बाद एयरलाइंस में नौकरी के लिए आवेदन किया जा सकता है.

पिछले एक दशक में भारत में महिला पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ी है. कई एयरलाइंस अब महिला कैंडिडेट्स के लिए खास ट्रेनिंग और स्कॉलरशिप कार्यक्रम चला रही हैं. IndiGo और Air India जैसी कंपनियों में आज बड़ी संख्या में महिलाएं कॉकपिट की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल थीं. उन्होंने 1936 में महज 21 साल की उम्र में पायलट लाइसेंस हासिल किया था. उस दौर में जब महिलाओं के लिए एविएशन में जाना बेहद मुश्किल माना जाता था, तब सरला ठकराल ने इस क्षेत्र में कदम रखकर नई पीढ़ी के लिए रास्ता खोला.

आज भारतीय एविएशन सेक्टर में महिलाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं. IndiGo में 1000 महिला पायलटों का आंकड़ा इसी बदलाव की झलक है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एयरलाइंस में महिला पायलटों की संख्या और तेजी से बढ़ेगी और यह क्षेत्र लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा उदाहरण बन सकता है.
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