दिसंबर 2023 से जून 2024 के बीच हुए ब्रेकआउट के बाद निफ्टी मेटल इंडेक्स ने 48% की तूफानी तेजी दिखाई थी. अक्टूबर 2025 में फिर से एक बड़ा ब्रेकआउट हुआ है और तब से इंडेक्स 20% बढ़ चुका है.
. बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्थामें कॉपर अब ‘ग्रोथ हेवन’ के रूपमें अपनी पहचान बना रहा है.
सोने को संकट के समय का सबसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता रहा है. बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्थामें कॉपर अब ‘ग्रोथ हेवन’ के रूपमें अपनी पहचान बना रहा है.तकनीकी मोर्चे पर देखें तो हाल ही में COMEX कॉपर ने अपने साप्ताहिक चार्ट पर लगभग 20 साल पुराने ‘राइजिंग चैनल’ के ऊपर ब्रेकआउट दिया है. दो दशकों के कड़े रेजिस्टेंस को तोड़ना महज एक इत्तेफाक नहीं है. यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि दुनिया भर में कॉपर की डिमांड और सप्लाई का गणित बुनियादी तौर पर बदल चुका है. जिस तरह अगस्त 2025 में सोने ने $3,500 के बैरियर को तोड़कर $5,600 तक की अविश्वसनीय छलांग लगाई थी, कॉपर भी ठीक उसी रास्ते पर बढ़ता नजर आ रहा है.
तांबे की खूब मांग
आज दुनियाभर की सरकारें कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), स्मार्ट पावरग्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं. इन सभी भविष्योन्मुखी तकनीकों की रीढ़ ‘कॉपर’ ही है.अब यह सिर्फ फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाली एक औद्योगिक धातु भर नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक आर्थिक विकास (Global Growth Cycle) का सबसे आधुनिक और बड़ा प्रतीक बन गई है.
क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयरबाजार में ‘निफ्टी मेटल इंडेक्स’ की चाल भी इसी सुनहरी कहानी पर मुहर लगा रही है. हीकिनआशी (Heikin Ashi) चार्ट जैसे तकनीकी टूल्स का विश्लेषण करें तो मेटल इंडेक्स में लगातार ‘बुलिश कैंडल्स’ का निर्माण हो रहा है, जो एक बहुत बड़े और लंबे अपट्रेंड की ओर इशारा कर रहे हैं.
दिसंबर 2023 से जून 2024 के बीच हुए ब्रेकआउट के बाद इस इंडेक्स ने 48% की तूफानी तेजी दिखाई थी. अक्टूबर 2025 में फिर से एक बड़ा ब्रेकआउट हुआ है और तब से इंडेक्स 20% बढ़ चुका है. जानकारों का मानना है कि यदि यह मोमेंटम जारी रहा, तो आने वाले कुछ महीनों में मेटल इंडेक्स 15,000 के जादुई स्तर को छू सकता है. ऐसे में बाजार की वर्तमान गिरावट और अस्थिरता को खतरे के रूप में देखने के बजाय,क्वालिटी मेटल शेयरों को पोर्टफोलियो में शामिल करने के एक सुनहरे अवसर के तौर पर देखा जाना चाहिए.
कम है सप्लाई
बाजार विश्लेषकों और कमोडिटी एक्सपर्ट्स के बीच अब चर्चा इस बात पर नहीं है कि तांबा कितना बिकेगा, बल्कि इस पर है कि क्या पर्याप्त तांबा उपलब्ध होगा? अनुमान है कि 2026 तक वैश्विक बाजार में तांबे की सप्लाई में एक ‘स्ट्रक्चरल कमी’ देखने को मिल सकती है. नई खदानों को विकसित करनेऔर उत्पादन शुरू करने में अक्सर 10 से 15 साल का लंबा समय लगता है, जबकि मांग हर साल तेजी से बढ़ रही है. इस वजह से तांबे में निवेश लॉन्ग टर्म में फायदेमंद हो सकता है. तांबे की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई बार $13,000 प्रति टन के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुकी हैं.
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