कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) . दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है. युद्ध के कारण जहाजों का आवागमन रुक गया या बहुत कम हो गया. ईरान के आसपास तेल उत्पादन और शिपिंग पर असर पड़ा है. कई तेल कंपनियों ने फोर्स मेज्योर घोषित किया, यानी आपात स्थिति में सप्लाई रोक दी. इससे सप्लाई में डर पैदा हुआ और कीमतें आसमान छूने लगीं. कई देशों में तो पेट्रोल-डीजल की कीमते आसमान पर पहुंच गई हैं.
इन देशों में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
पाकिस्तान में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं. पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 55 पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. यह ऐलान पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक, उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने किया. इस बढ़ोतरी के बाद हाई-स्पीड डीजल की एक्स-डिपो कीमत 280.86 रुपये से बढ़कर 335.86 रुपये प्रति लीटर हो गई है, यानी लगभग 20% की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, पेट्रोल की एक्स-डिपो कीमत 266.17 रुपये से बढ़कर 321.17 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो करीब 17% ज्यादा है. ऐसे में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई. पाकिस्तान अपने तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और यूएई से आयात करता है, जो हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है. ऐसे में पाकिस्तान को तेल की कमी का डर है क्योंकि पाकिस्तान ज्यादातर तेल आयात करता है.
बांग्लादेश में भी सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर राशनिंग लगा दी है, यानी हर व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही मिलेगा. ये कदम सरकार ने पैनिक बाइंग (घबराहट में ज्यादा खरीदारी) से बचने के लिए उठाया है. कुछ जगहों पर स्कूल-यूनिवर्सिटी बंद कर दी गईं और बिजली-ईंधन बचाने के उपाय किए जा रहे हैं. वहां भी 95% ऊर्जा आयात पर निर्भर है.
इसके अलावा सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CPC) ने 9 मार्च की रात से पूरे श्रीलंका में ईंधन की कीमतें बढ़ाने का ऐलान किया है. नई कीमतें Ceypetco पेट्रोल पंपों पर लागू होंगी. इसके तहत लंका में पेट्रोल 92 ऑक्टेन की कीमत 24 रुपये बढ़कर 317 रुपये प्रति लीटर और लंका पेट्रोल 95 ऑक्टेन यूरो-4 की कीमत 25 रुपये बढ़कर 365 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
इसके अलावा सीलोन व्हाइट डीजल 22 रुपये बढ़कर 303 रुपये प्रति लीटर और लंका सुपर डीजल 4 स्टार यूरो-4 की कीमत 24 रुपये बढ़कर 353 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं सीलोन केरोसीन की कीमत भी 13 रुपये बढ़कर 195 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
भारत पर क्या असर?
भारत अपनी जरूरत का 80-85% से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा है, लेकिन अभी तक भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ी हैं. सरकार और तेल कंपनियां इसे लेकर बेहद सतर्क हैं. पिछले हफ्ते एलपीजी सिलेंडर महंगा हुआ था, लेकिन पेट्रोल-डीजल पर कोई बदलाव नहीं हुआ. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत वैकल्पिक रास्तों से तेल मंगवा रहा है, जैसे रूस से ज्यादा तेल खरीदने पर फोकस कर रहा है. देश में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक 64-65 दिनों के लिए पर्याप्त है. केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि स्टॉक काफी है और कमी नहीं होगी. अगर संघर्ष लंबा चला तो कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा. लेकिन फिलहाल सरकार उपभोक्ताओं को बचाने की कोशिश कर रही है.
इससे ये बात तो साफ जाहिर होती है कि यह संघर्ष सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला रहा है. एशियाई देशों में सरकारें आपात योजनाएं चला रही हैं. कुछ ने कीमतें कैप कीं, कुछ ने फ्यूल बचत के नियम बनाए. भारत में अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगर युद्ध लंबा चला या होर्मुज पूरी तरह बंद रहा तो चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
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