1 फरवरी 2026 से लागू हुई नई एक्साइज ड्यूटी और बजट 2026 की घोषणाओं के कारण आईटीसी (ITC) और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सरकार ने सिगरेट पर लंबाई के आधार पर ₹2,050 से ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक की एक्साइज ड्यूटी लगा दी है, जिससे प्रति सिगरेट की कीमत में ₹2-3 की बढ़ोतरी होने की आशंका है.
सरकार ने आज से सिगरेट पर नई एक्साइज ड्यूटी प्रभावी कर दी है, जिससे सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. इसके अलावा, बजट 2026 में चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और सुगंधित तंबाकू पर लगने वाले एनसीसीडी (NCCD) रेट को भी 25 प्रतिशत से सीधे बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है. यह नई दर मई 2026 से लागू होगी, जो तंबाकू उद्योग के लिए आने वाले समय में एक बड़ी रेगुलेटरी चुनौती साबित होने वाली है.
सिगरेट कंपनियों पर टैक्स का गणित और स्टॉक पर असर
सिगरेट कंपनियों के लिए आज का दिन काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसे हम निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं:
- एक्साइज ड्यूटी का बड़ा बोझ: सिगरेट पर अब 40% जीएसटी के ऊपर यह नई एक्साइज ड्यूटी लगेगी. विश्लेषकों के अनुसार, 75-85 मिमी लंबी सिगरेट की कुल लागत में 22-28% तक की वृद्धि हो सकती है. इसका सीधा मतलब है कि ग्राहकों को अब एक सिगरेट के लिए 2 से 3 रुपये अधिक चुकाने पड़ सकते हैं.
- शेयरों में गिरावट का दौर: आज के कारोबार में आईटीसी का शेयर 3% गिरकर 311.6 रुपये पर आ गया, वहीं गॉडफ्रे फिलिप्स में 2% से ज्यादा की गिरावट रही. ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर ने आईटीसी के लिए अपना टारगेट प्राइस घटाकर 314 रुपये कर दिया है और ‘Reduce’ (बेचने) की सलाह दी है.
- WHO बेंचमार्क की ओर कदम: भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स फिलहाल रिटेल कीमत का लगभग 53% है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 75% के मानक से अभी भी कम है. सरकार धीरे-धीरे टैक्स बढ़ाकर तंबाकू के सेवन को हतोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है.
- बजट 2026 का नया एलान: केवल सिगरेट ही नहीं, बल्कि अन्य तंबाकू उत्पादों पर भी सरकार सख्त हुई है. जर्दा और सुगंधित तंबाकू पर टैक्स को दोगुने से भी ज्यादा (25% से 60%) करना यह दर्शाता है कि सरकार इस पूरे सेक्टर पर नियंत्रण बढ़ाना चाहती है.
क्या है आगे की राह?
हालांकि सिगरेट सेगमेंट पर दबाव बना हुआ है, लेकिन ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि आईटीसी जैसी कंपनियों को उनके अन्य व्यवसायों (FMCG, पेपर बोर्ड और होटल) से सहारा मिल सकता है. आईटीसी का एफएमसीजी बिजनेस और डिजिटल-फर्स्ट पोर्टफोलियो अच्छी ग्रोथ दिखा रहा है, जो सिगरेट सेगमेंट में होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई कर सकता है. लेकिन निकट भविष्य में, टैक्स के बोझ के कारण कंपनियों के वॉल्यूम और मुनाफे पर असर पड़ना तय माना जा रहा है.
About the Author

जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.