Jet Fuel Price : ईरान और अमेरिका में चल रहे युद्ध और पश्चिम एशियाई संकट के बीच ईंधन जोखिम का पहला संकेत आ चुका है. जेट फ्यूल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों में ही 72 फीसदी का उछाल देखा जा रहा है. यह बताता है कि भारत जैसे एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के लिए आने वाले समय का सबसे बड़ा संकट बनने वाला है.
ईरान संकट के बाद जेट फ्यूल की कीमत 72 फीसदी बढ़ चुकी है.
एशिया के ट्रेडिंग हब सिंगापुर में जेट ईंधन की कीमतें बुधवार को 72% बढ़कर 225.44 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं. इसकी वजह यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे भविष्य में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. जेट केरोसीन की स्पॉट कीमत 27 फरवरी को $93.45 प्रति बैरल के बंद भाव से 140% बढ़ चुकी है.
जेट फ्यूल पर सबसे ज्यादा असर
वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह आश्वासन देने की कोशिश कर रहे हैं कि टैंकर उस संकरे जलमार्ग से गुजर सकेंगे, जिससे दुनिया की 20 फीसदी तेल की खेप गुजरती है, लेकिन बाजार अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. जेट ईंधन कच्चे तेल के बैरल का वह हिस्सा है जो आपूर्ति में बाधा आने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. इसकी इन्वेंट्री सबसे कम होती है और इसे विशेष टैंकों में ही स्टोर करना पड़ता है. लिहाजा जेट फ्यूल की कीमतों पर ही इसका सबसे ज्यादा और जल्दी असर दिखाई देता है.
बाजार में भारी कमी का अनुमान
जेट फ्यूल की तेज बढ़ती स्पॉट कीमत का मतलब है कि दुबई क्रूड से एक बैरल जेट केरोसीन बनाने का मुनाफा अब $100 से ज्यादा प्रति बैरल हो गया है, जो यह दर्शाता है कि बाजार के लोग आने वाले हफ्तों में भारी कमी की उम्मीद कर रहे हैं. जेट फ्यूल की कीमतों में आई यह भारी बढ़ोतरी शायद जरूरत से ज्यादा है, क्योंकि ये स्तर उस स्थिति से भी कहीं ज्यादा हैं, जब स्ट्रेट ऑफ होरमुज लंबे समय तक बंद हो जाए. हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि एशियाई रिफाइनरियों में तनाव के संकेत बढ़ रहे हैं. कुछ प्लांट्स कच्चे तेल का स्टॉक बचाने के लिए अपने ऑपरेटिंग रेट कम कर रहे हैं, जबकि कुछ नेटेनेंस का समय पहले कर रहे हैं.
भारतीय रिफाइनरी ने रोका निर्यात
भारत की मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स ने बुधवार को ईंधन निर्यात को रोक दिया है. कर्नाटक में 3 लाख बैरल प्रतिदिन का प्लांट चलाने वाली यह सरकारी रिफाइनरी अपने कुल रिफाइंड ईंधन उत्पादन का करीब 40% निर्यात करती है. अन्य रिफाइनरियां भी एमआरपीएल के कदम का पालन करेंगी. खासकर भारत की रिफाइनरियां, जो अपने कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से मंगाती हैं और कम समय में वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता ढूंढने में मुश्किल का सामना करेंगी. चीन ने अपनी कंपनियों से कहा है कि वे रिफाइंड फ्यूल के नए निर्यात अनुबंधों पर हस्ताक्षर करना रोक दें और पहले से तय की गई शिपमेंट्स को रद्द करने की कोशिश करें.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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