भारतीय रेलवे में आधुनिक एलएचबी कोचों का उत्पादन बीते एक दशक में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक 2014 से 2025 के बीच देश में 42677 एलएचबी कोच बनाए गए, जो 2004 से 2014 के मुकाबले 18 गुना से ज्यादा है. यह बदलाव रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुरक्षा को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पुराने आईसीएफ कोचों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर सुरक्षित और हाई स्पीड एलएचबी कोच लगाए जा रहे हैं. इन कोचों में बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम, एंटी क्लाइंबिंग तकनीक और ज्यादा आराम जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जिससे हादसों का खतरा भी कम हुआ है.
एलएचबी यानी लिंक हॉफमैन बुश कोच जर्मन तकनीक पर आधारित आधुनिक पैसेंजर कोच होते हैं. इन्हें स्टेनलेस स्टील से तैयार किया जाता है और यह 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किए गए हैं. इन कोचों में डिस्क ब्रेक, बेहतर सस्पेंशन और ज्यादा आरामदायक इंटीरियर मिलता है.
हादसों में ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं एलएचबी कोच
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि एलएचबी कोचों में एंटी टेलीस्कोपिक और एंटी क्लाइंबिंग फीचर होते हैं. इसका मतलब यह है कि टक्कर की स्थिति में कोच एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे जानमाल का नुकसान काफी हद तक कम हो जाता है. यही वजह है कि रेलवे पुराने आईसीएफ कोचों को हटाकर एलएचबी कोच लगाने पर जोर दे रहा है.
देश में कहां बनते हैं एलएचबी कोच
फिलहाल रेलवे मंत्रालय के तहत देश में तीन कोच निर्माण इकाइयां काम कर रही हैं. इनमें इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली शामिल हैं. इन यूनिट्स में समय समय पर तकनीकी अपग्रेडेशन और क्षमता विस्तार किया गया है.
कोच फैक्ट्रियों पर कितना खर्च हुआ
रेल मंत्री ने बताया कि कोच निर्माण यूनिट्स का विकास कई चरणों में होता है और इस पर लंबे समय तक खर्च किया जाता है. मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली की स्थापना पर अब तक 3042.83 करोड रुपये खर्च किए जा चुके हैं. इसके अलावा तीनों यूनिट्स के अपग्रेडेशन और विस्तार के लिए 2443 करोड रुपये की मंजूरी दी गई है.
पुराने आईसीएफ कोचों की हो रही विदाई
भारतीय रेलवे में आईसीएफ कोचों को हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है. एलएचबी कोच हल्के डिजाइन, बेहतर राइड क्वालिटी, एयर सस्पेंशन और आधुनिक ब्रेकिंग सिस्टम से लैस होते हैं. रेलवे का मानना है कि इससे यात्रियों को ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और भरोसेमंद सफर मिल सकेगा.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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