वित्तमंत्री से जब पूछा गया कि क्या आप सोचती हैं कि बात आगे बढ़ी है? इस पर सीतारमण ने कहा, ‘हमने यूरोपीय यूनियन के साथ एफटीए साइन किया है. यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के साथ डील की है. तो काम चल रहा है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बात चल रही है.’
इससे ट्रेड सेक्रेटरी ने दिया था क्या बताया था?
इससे पहले वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील बहुत करीब है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि अमेरिका एक विशाल अर्थव्यवस्था है, इसलिए एक व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में अभी और समय लग सकता है. राजेश अग्रवाल ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि जल्द से जल्द हो, लेकिन मैं कोई निश्चित तारीख नहीं दे सकता. It Takes Two to Tango मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा कि व्यापार समझौतों के लिए दोनों पक्षों के बीच समान भूख और प्रयास की आवश्यकता होती है.
डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की ‘केमिस्ट्री’ का असर
इस डील की उम्मीदें इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि पिछले महीने मनीकंट्रोल से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की थी. ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना शानदार दोस्त बताते हुए विश्वास जताया था कि दोनों देश एक अच्छी डील करेंगे. राष्ट्रपति ट्रंप के इस सकारात्मक रुख ने बातचीत में नई जान फूंक दी है.
निर्यात का नया रिकॉर्ड
बजट 2026 के बाद भारत की एक्सपोर्ट कहानी और मजबूत होती दिख रही है. वाणिज्य सचिव के अनुसार, एक बार चालू व्यापार समझौते पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद, भारतीय निर्यातकों की पहुंच दुनिया के करीब 60% बाजारों तक हो जाएगी. भारत इस साल 850 बिलियन डॉलर के निर्यात का आंकड़ा पार करने का लक्ष्य रख रहा है. पिछले साल यह आंकड़ा 825 बिलियन डॉलर था.
इकोनॉमिक सर्वे की भविष्यवाणी
आर्थिक सर्वेक्षण में भी भविष्यवाणी की गई थी कि अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता इस साल समाप्त होने की उम्मीद है. इससे वैश्विक मोर्चे पर बनी अनिश्चितता कम होगी और भारत को एक स्थिर बाहरी बाजार मिलेगा. हाल ही में अमेरिका द्वारा 200 से अधिक भारतीय कृषि उत्पादों मसाले, चाय, कॉफी को ऊंचे टैरिफ से छूट देना एक बड़ा ‘कंस्ट्रक्टिव’ कदम माना जा रहा है.
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