क्या आपको लगता है कि रिटायरमेंट के लिए आपकी बचत कम है? अगर 40 की उम्र के बाद यह अहसास हुआ है, तो भी देर नहीं हुई है. सही रणनीति और अनुशासन से कम समय में भी फंड बढ़ाया जा सकता है. बस जरूरत है बचत बढ़ाने और खर्चों पर सख्ती से नियंत्रण रखने की.
40 के बाद जागे हैं तो भी देर नहीं, समझदारी से भरें रिटायरमेंट गैप. (Image:AI)
रिटर्न नहीं, बचत पर रखें फोकस
अब आपके पास लंबा समय नहीं है, इसलिए ज्यादा रिटर्न की उम्मीद से ज्यादा जरूरी है ज्यादा बचत करना. बाजार कब ऊपर जाएगा या नीचे, यह आपके नियंत्रण में नहीं है, लेकिन आपकी बचत और खर्च की आदतें आपके हाथ में हैं. अगर आप ईपीएफ के दायरे में आते हैं, तो 12 फीसदी से ज्यादा योगदान देने पर विचार करें. एनपीएस (National Pension System) जैसे विकल्प टैक्स बचत के साथ अनुशासित निवेश का मौका देते हैं. कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड या रिकरिंग डिपॉजिट भी सुरक्षित रास्ता हो सकते हैं.
बड़ा जोखिम लेने से बचें
कमी पूरी करने के लिए ऊंचा जोखिम उठाना खतरनाक हो सकता है. रिटायरमेंट प्लानिंग को टी-20 मैच की तरह न देखें, जहां आखिरी ओवर में बड़े शॉट लगाने पड़ते हैं. बहुत ज्यादा आक्रामक निवेश से पूंजी को नुकसान हो सकता है. फिर भी पूरी तरह इक्विटी से दूर न रहें. 10–15 फीसदी हिस्सा बड़ी कंपनियों के शेयर या लो-कॉस्ट ETF में रखने से लंबे समय में संतुलित ग्रोथ मिल सकती है.
गैर-जरूरी खर्चों में कटौती जरूरी
अगर बचत कम पड़ रही है, तो खर्चों की समीक्षा करें. नई कार, महंगा टीवी या बार-बार छुट्टियां- इन फैसलों को टालना समझदारी हो सकती है. छोटी-छोटी बचत मिलकर बड़ा अंतर डालती है. आज की थोड़ी सादगी भविष्य के आर्थिक तनाव से बचा सकती है. जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझना इस चरण में बेहद अहम है.
रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने पर विचार करें
अगर फंड अभी भी कम लग रहा है, तो रिटायरमेंट कुछ साल टालने पर विचार करें. 3- 5 साल ज्यादा काम करने से दोहरा फायदा होता है-बचत बढ़ती है और फंड को कम समय तक चलाना पड़ता है. इसके लिए स्वास्थ्य और कौशल दोनों को अपडेट रखना जरूरी है. प्रोफेशनल नेटवर्क मजबूत रखें और खुद को नई तकनीक के साथ जोड़े रखें.
रिवर्स मॉर्गेज भी एक विकल्प
भारत में कई लोग संपत्ति के मालिक तो होते हैं, लेकिन नकदी की कमी से जूझते हैं. ऐसे में रिवर्स मॉर्गेज एक विकल्प हो सकता है, जिसमें बैंक घर के मूल्य के आधार पर मासिक आय देता है. हालांकि भारत में यह अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह सहारा बन सकता है. अंत में, रिटायरमेंट प्लानिंग में देर हो जाने का मतलब यह नहीं कि रास्ता बंद हो गया. सही रणनीति, अनुशासन और यथार्थवादी लक्ष्य के साथ आप अपने सुनहरे भविष्य की नींव अभी भी मजबूत कर सकते हैं.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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