IPO कमेटी का गठन, तब्लेश पांडे को जिम्मेदारी
IPO प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता गैर-स्वतंत्र निदेशक तब्लेश पांडे करेंगे, जो पहले LIC के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं. इस कमेटी में पब्लिक इंटरेस्ट डायरेक्टर्स श्रीनिवास इन्जेटी, ममता बिस्वाल, अभिलाषा कुमारी और जी. शिवकुमार शामिल हैं. इसके अलावा NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीष कुमार चौहान भी कमेटी का हिस्सा होंगे. यह कमेटी IPO से जुड़े हर अहम कदम की निगरानी करेगी.
अगले हफ्ते से शुरू होगी IPO की औपचारिक प्रक्रिया
सूत्रों के मुताबिक IPO कमेटी के मार्गदर्शन में अगले हफ्ते से NSE के पब्लिक इश्यू की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. सबसे पहले मर्चेंट बैंकर और लीगल एडवाइजर की नियुक्ति के लिए मानदंड तय किए जाएंगे. इसके बाद ‘ब्यूटी परेड’ यानी पिच प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें योग्य मर्चेंट बैंकर अपना प्रेजेंटेशन देंगे. यही टीमें आगे चलकर ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करेंगी.
DRHP मार्च-अप्रैल में दाखिल होने की संभावना
जानकारी के अनुसार NSE मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में DRHP दाखिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. अगर सितंबर तिमाही के ऑडिटेड नतीजों के आधार पर दस्तावेज तैयार किए जाते हैं, तो मार्च के अंत तक फाइलिंग संभव है. वहीं, अगर दिसंबर तिमाही के ऑडिटेड आंकड़े शामिल किए गए, तो प्रक्रिया अप्रैल तक खिसक सकती है. हाल ही में सेबी से मिले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NoC) के बाद यह प्रक्रिया तेज हुई है.
23,000 करोड़ रुपये का हो सकता है IPO, OFS होगा मॉडल
NSE का प्रस्तावित IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा. मौजूदा शेयरधारक करीब 4.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकते हैं. वर्तमान अनलिस्टेड बाजार भाव करीब 2,000 रुपये प्रति शेयर मानें, तो इश्यू का आकार लगभग 23,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. NSE के CEO आशीष चौहान पहले ही साफ कर चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर ही फ्रेश इश्यू पर विचार होगा, प्राथमिकता OFS की ही रहेगी.
2016 में अटक गया था लिस्टिंग का सपना
यह पहली बार नहीं है जब NSE IPO की तैयारी कर रहा है. साल 2016 में एक्सचेंज ने लिस्टिंग का प्रयास किया था, लेकिन नियामकीय जांच और कथित अनियमितताओं के चलते उसे योजना वापस लेनी पड़ी थी. मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जहां NSE और सेबी दोनों पक्ष बने थे. अब सेबी की मंजूरी मिलने के बाद NSE को एक नई शुरुआत का मौका मिला है.
कोल एक्सचेंज सब्सिडियरी को भी मंजूरी
IPO के अलावा बोर्ड ने एक और अहम फैसला लिया है. कोयला मंत्रालय के प्रस्तावित कोल रेगुलेशंस 2025 के तहत NSE एक कोल एक्सचेंज सब्सिडियरी स्थापित करेगा. इस नई इकाई में NSE कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगा और शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये तक निवेश करेगा. यह प्लेटफॉर्म कोयले की फिजिकल ट्रेडिंग को इलेक्ट्रॉनिक रूप देगा, जिससे पारदर्शिता और बेहतर प्राइस डिस्कवरी संभव होगी. भविष्य में यहां डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स लाने की भी संभावना जताई जा रही है.
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